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भारत-साइप्रस के रिश्ते अब और होंगे मजबूत, पीएम मोदी ने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी में बदला

भारत-साइप्रस के रिश्ते अब और होंगे मजबूत, पीएम मोदी ने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी में बदला

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स के साथ नई दिल्ली में हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद भारत और साइप्रस के संबंधों को 'रणनीतिक साझेदारी' (Strategic Partnership) के स्तर पर ले जाने की घोषणा की है. पीएम मोदी ने इस कदम को दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को एक "नई महत्वाकांक्षा और नई गति" देने वाला ऐतिहासिक कदम बताया है. दोनों नेताओं ने हैदराबाद हाउस में साझा प्रेस वक्तव्य जारी कर विस्तृत सहयोग योजनाओं को सामने रखा.

प्रधानमंत्री मोदी ने रेखांकित किया कि भारत और साइप्रस की दोस्ती साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन के प्रति सम्मान, और सभी राष्ट्रों की संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता के प्रति प्रतिबद्धता पर आधारित है. राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलाइड्स और उनके प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री ने अपनी पिछली साइप्रस यात्रा को भी याद किया, जहां उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा गया था.

बढ़ता आर्थिक सहयोग और गिफ्ट सिटी (GIFT City) पर फोकस

दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक सहयोग को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि साइप्रस भारत के शीर्ष दस निवेशकों में शामिल हो चुका है और पिछले एक दशक में साइप्रस से भारत में होने वाला निवेश लगभग दोगुना हो गया है. उन्होंने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (India-EU FTA) ने व्यापार के कई नए द्वार खोले हैं और इसका लाभ उठाते हुए दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों में इस निवेश को एक बार फिर दोगुना करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है.

इस नई रणनीतिक साझेदारी के तहत वाणिज्य, वित्त, नवाचार, बुनियादी ढांचे, शिपिंग और समुद्री क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत किया जाएगा. पीएम मोदी ने कहा कि यह साझेदारी दोनों देशों के वित्तीय और सेवा केंद्रों को जोड़कर व्यापार के लिए पूंजी के प्रवाह को आसान बनाएगी. इस दिशा में गुजरात की 'गिफ्ट सिटी' (GIFT City) को एक वैश्विक वित्तीय और सेवा केंद्र के रूप में मजबूत करने के लिए दोनों पक्ष मिलकर काम करेंगे.

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रक्षा, सुरक्षा और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी पर रणनीतिक सहमति

द्विपक्षीय वार्ता में रक्षा और सुरक्षा सहयोग को रिश्ते का एक महत्वपूर्ण स्तंभ माना गया. पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच सैन्य आदान-प्रदान और प्रशिक्षण सहयोग में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है. इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए दोनों नेताओं ने साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा (Maritime Security) और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में आपसी सहयोग को और अधिक मजबूत करने का बड़ा फैसला लिया है.

इसके अतिरिक्त, भारत और साइप्रस क्षेत्रीय कनेक्टिविटी पहलों पर भी सहयोग करने के लिए सहमत हुए हैं. इसमें विशेष रूप से महत्वाकांक्षी भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC) और इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव शामिल हैं, जो आने वाले समय में वैश्विक व्यापारिक मार्गों को नई दिशा देंगे. साथ ही, संस्कृति और उच्च शिक्षा के क्षेत्रों में भी अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए.

प्रवासन समझौता और वैश्विक मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण

साइप्रस में रहने वाले भारतीय पेशेवरों और छात्रों के योगदान की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि दोनों पक्ष जल्द ही एक व्यापक प्रवासन और गतिशीलता साझेदारी (Migration and Mobility Partnership) तथा एक सामाजिक सुरक्षा समझौते (Social Security Agreement) को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं, जिससे नागरिकों को कानूनी और सामाजिक सुरक्षा मिल सके.

वैश्विक मुद्दों पर बात करते हुए दोनों नेताओं ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया (Mid-East) के घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान किया और संघर्षों के शांतिपूर्ण व राजनयिक समाधान के प्रति अपना समर्थन दोहराया. पीएम मोदी ने अंत में कहा कि वर्तमान वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक संस्थाओं (जैसे संयुक्त राष्ट्र) में तत्काल सुधार बेहद आवश्यक हैं और भारत-साइप्रस की यह साझेदारी सहयोग से बढ़कर सह-सृजन और साझा समृद्धि की ओर बढ़ने का जरिया बनेगी.

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