BREAKING :
Samsung Galaxy S26 FE की पहली LIVE फोटो लीक! डिजाइन देखकर चौंक गए फैंस चार्जिंग में भी बड़ा अपग्रेड EV खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर! Tata Power का चार्जिंग नेटवर्क अब 700 शहरों तक पहुंचा प्रेग्नेंसी का पता चलने से पहले ले ली Ozempic? Harvard की नई रिपोर्ट में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई सीतापुर में बनेगा 250 MW सोलर प्लांट राजनाथ सिंह की मंजूरी सेना को मिलेगी 24x7 ग्रीन बिजली World Cup 2026 विवाद ईरान के फैंस का टिकट कोटा रोका गया FIFA पर बढ़ा दबाव 8000mAh बैटरी वाला Tecno Pova 8 आ रहा है! 11 जून लॉन्च कीमत जानकर चौंक जाएंगे TMC को बड़ा झटका सुखेंदु शेखर रॉय ने छोड़ी पार्टी भाजपा में जाने के संकेत ₹44,490 में मिल रही इलेक्ट्रic स्कूटर! Hero, TVS, Bajaj और Ather में कौन है सबसे सस्ता? भारत में लॉन्च हुआ E85 फ्यूल! पेट्रोल से ₹20 सस्ता बदल सकता है कार चलाने का पूरा गणित 15 साल बाद DTC की धमाकेदार वापसी! अयोध्या-वैष्णो देवी के लिए वोल्वो बसें 2800 नई ई-बसों का ऐलान

केरल कांग्रेस में सीएम संग्राम दिल्ली में बंद कमरे, केरल में पोस्टर वॉर आखिर किसके सिर सजेगा ताज ?

केरल कांग्रेस में सीएम संग्राम दिल्ली में बंद कमरे, केरल में पोस्टर वॉर आखिर किसके सिर सजेगा ताज ?

तिरुवनंतपुरम/नई दिल्ली।

केरल विधानसभा चुनाव 2026 में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने वाली कांग्रेस अब अपने ही सबसे कठिन राजनीतिक मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है। 10 साल बाद सत्ता में वापसी करने वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर सस्पेंस लगातार गहराता जा रहा है।

दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के स्तर पर लगातार बैठकों और अंदरूनी मंथन का दौर जारी है, जबकि केरल में पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच खुला शक्ति प्रदर्शन शुरू हो चुका है।

फिलहाल मुख्यमंत्री पद की दौड़ तीन बड़े नेताओं के बीच सिमटी मानी जा रही है — नेता प्रतिपक्ष रहे वी.डी. सतीशन, कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल और वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला। हालांकि पार्टी सूत्रों का कहना है कि असली मुकाबला सतीशन और वेणुगोपाल के बीच ही बन चुका है।

Must Read TMC को बड़ा झटका सुखेंदु शेखर रॉय ने छोड़ी पार्टी भाजपा में जाने के संकेत TMC को बड़ा झटका सुखेंदु शेखर रॉय ने छोड़ी पार्टी भाजपा में जाने के संकेत

कांग्रेस विधायक दल (CLP) की बैठक में सभी नवनिर्वाचित विधायकों ने एक लाइन का प्रस्ताव पास कर मुख्यमंत्री चुनने का अधिकार हाईकमान को सौंप दिया, लेकिन इसके बावजूद पार्टी के भीतर की खींचतान अब सार्वजनिक रूप लेती दिखाई दे रही है।

जीत के बाद शुरू हुआ अंदरूनी दबाव

140 सदस्यीय विधानसभा में UDF ने 102 सीटें जीतकर जबरदस्त वापसी की। यह जीत सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि केरल की राजनीति में कांग्रेस के पुनर्जीवन के तौर पर भी देखी जा रही है। लेकिन परिणाम आने के साथ ही यह सवाल उठने लगा कि इस जीत का राजनीतिक चेहरा कौन होगा। कांग्रेस पर्यवेक्षक अजय माकन और मुकुल वासनिक ने विधायकों, सांसदों और वरिष्ठ नेताओं से अलग-अलग बातचीत कर उनकी राय ली। इसके बाद रिपोर्ट कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को सौंप दी गई।

सूत्रों के मुताबिक, कई विधायकों ने के.सी. वेणुगोपाल के पक्ष में समर्थन जताया है। वहीं दूसरी ओर, जमीनी स्तर पर वी.डी. सतीशन के समर्थन में माहौल अधिक मजबूत दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि कांग्रेस हाईकमान अब ऐसे फैसले की तलाश में है जिससे सरकार बनने से पहले पार्टी के भीतर किसी तरह का असंतोष खुलकर सामने न आए।

वी.डी. सतीशन चुनावी संघर्ष का चेहरा

पिछले पांच वर्षों में वी.डी. सतीशन कांग्रेस के सबसे आक्रामक नेताओं में उभरे। नेता प्रतिपक्ष के रूप में उन्होंने पिनराई विजयन सरकार को लगातार घेरा और भ्रष्टाचार, कानून व्यवस्था तथा प्रशासनिक मुद्दों पर विपक्ष की राजनीति को धार दी। कांग्रेस के भीतर एक बड़ा वर्ग मानता है कि UDF की वापसी के पीछे सबसे बड़ी भूमिका सतीशन की रही।

Also Read अब सिफारिश नहीं मेरिट का दौर मोदी सरकार के 12 साल पर जितेंद्र सिंह का बड़ा दावा अब सिफारिश नहीं मेरिट का दौर मोदी सरकार के 12 साल पर जितेंद्र सिंह का बड़ा दावा

अल्पसंख्यक समुदायों और चर्च संगठनों के साथ कांग्रेस के रिश्तों को फिर मजबूत करने का श्रेय भी काफी हद तक उन्हें दिया जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी सतीशन के समर्थन में व्यापक अभियान देखने को मिल रहा है। राहुल गांधी के पोस्ट्स के नीचे हजारों समर्थकों ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की मांग की है। कई कार्यकर्ताओं का तर्क है कि चुनाव पूरे समय सतीशन के नेतृत्व और चेहरे पर लड़ा गया, इसलिए मुख्यमंत्री पद भी उन्हें ही मिलना चाहिए।

के.सी. वेणुगोपाल हाईकमान का भरोसेमंद चेहरा

दूसरी तरफ के.सी. वेणुगोपाल संगठनात्मक राजनीति के सबसे मजबूत खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। AICC महासचिव होने के साथ-साथ राहुल गांधी के करीबी नेताओं में उनकी पहचान है। पार्टी के भीतर उनकी पकड़ और दिल्ली नेतृत्व तक सीधी पहुंच उन्हें इस दौड़ में बेहद मजबूत बनाती है। सूत्र बताते हैं कि कई विधायक वेणुगोपाल को “प्रशासन और संगठन के बीच संतुलन बनाने वाला नेता” मान रहे हैं। हालांकि उनके विरोध में सबसे बड़ा तर्क यही दिया जा रहा है कि उन्होंने पिछले वर्षों में राज्य की राजनीति से ज्यादा राष्ट्रीय राजनीति पर ध्यान दिया।

कांग्रेस के कुछ नेता और समर्थक यह सवाल भी उठा रहे हैं कि क्या जनता ऐसे नेता को मुख्यमंत्री के रूप में स्वीकार करेगी जिसे “दिल्ली नेतृत्व की पसंद” माना जा रहा हो।

चेन्निथला अब भी रेस में

हालांकि मुख्यमंत्री की चर्चा मुख्य रूप से सतीशन और वेणुगोपाल के इर्द-गिर्द घूम रही है, लेकिन वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पार्टी का अनुभवी धड़ा उन्हें एक संतुलित और प्रशासनिक अनुभव वाला नेता मानता है। अगर हाईकमान को लगता है कि सतीशन और वेणुगोपाल में से किसी एक के चयन से बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है, तो चेन्निथला समझौते के उम्मीदवार के तौर पर उभर सकते हैं।

समर्थन सूची लीक होने से बढ़ी बेचैनी

मुख्यमंत्री चयन प्रक्रिया के बीच एक कथित सूची के सामने आने से कांग्रेस असहज स्थिति में आ गई।एक अखबार में छपी तस्वीर में कुछ विधायकों के नाम और उनके सामने समर्थन से जुड़े निशान दिखाई दिए। दावा किया गया कि यह उन विधायकों की सूची है जिन्होंने किसी खास नेता के पक्ष में राय दी।

हालांकि अजय माकन और मुकुल वासनिक ने इस सूची की प्रामाणिकता से इनकार किया, लेकिन इसके बाद पार्टी के भीतर आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए।

कुछ नेताओं ने दावा किया कि उनकी राय गलत तरीके से दर्ज की गई। एक विधायक ने पर्यवेक्षकों को ईमेल भेजकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने तक की नौबत आ गई।

इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया कि मुख्यमंत्री चयन सिर्फ औपचारिक प्रक्रिया नहीं रह गया, बल्कि कांग्रेस के भीतर शक्ति संतुलन की बड़ी लड़ाई बन चुका है।

केरल में पोस्टर वॉर दिल्ली में रणनीति

तिरुवनंतपुरम समेत कई शहरों में सतीशन और वेणुगोपाल समर्थकों ने बड़े पैमाने पर पोस्टर और फ्लेक्स लगाए हैं। सतीशन समर्थक उन्हें “जनता की पसंद” बता रहे हैं, जबकि वेणुगोपाल समर्थक “स्थिर और अनुभवी नेतृत्व” की जरूरत पर जोर दे रहे हैं।

दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व फिलहाल बेहद सतर्क रणनीति के साथ आगे बढ़ रहा है। पार्टी नहीं चाहती कि मुख्यमंत्री चयन को लेकर किसी भी तरह का खुला विद्रोह सामने आए। सूत्रों का कहना है कि हाईकमान तीनों नेताओं से अलग-अलग बातचीत कर रहा है ताकि किसी सहमति वाले फार्मूले तक पहुंचा जा सके।

वेणुगोपाल के सामने लोकसभा सीट का सवाल

के.सी. वेणुगोपाल अगर मुख्यमंत्री बनते हैं, तो उन्हें अलप्पुझा लोकसभा सीट छोड़नी पड़ेगी। कांग्रेस के भीतर यह भी एक बड़ा रणनीतिक मुद्दा बन गया है क्योंकि यह सीट पूरी तरह सुरक्षित नहीं मानी जाती। 2024 लोकसभा चुनाव में यहां मुकाबला काफी करीबी रहा था और भाजपा ने वोट प्रतिशत में उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की थी। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व इस संभावना पर भी विचार कर रहा है कि मुख्यमंत्री चयन का असर राष्ट्रीय राजनीति पर क्या पड़ेगा।

अंतिम फैसला राहुल गांधी-खड़गे पर निर्भर

कांग्रेस में अंतिम राजनीतिक निर्णय अब पूरी तरह हाईकमान के हाथ में है। मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और पार्टी के वरिष्ठ रणनीतिकारों के बीच लगातार चर्चा जारी है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ऐसा चेहरा चुनना चाहती है जो सिर्फ सरकार नहीं चलाए, बल्कि अगले पांच वर्षों तक कांग्रेस को एकजुट भी रख सके।

क्योंकि फिलहाल सबसे बड़ा खतरा विपक्ष से नहीं, बल्कि अंदरूनी असंतोष से माना जा रहा है। कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती केरल में कांग्रेस ने सत्ता तो हासिल कर ली, लेकिन अब असली चुनौती सत्ता को स्थिर बनाए रखने की है। मुख्यमंत्री चयन में हुई छोटी सी राजनीतिक गलती भी पार्टी के भीतर गुटबाजी को खुला रूप दे सकती है। यही वजह है कि दिल्ली में हर कदम बेहद सावधानी के साथ उठाया जा रहा है।

अब पूरा केरल सिर्फ इस सवाल का इंतजार कर रहा है 

क्या कांग्रेस जनता के बीच सबसे लोकप्रिय चेहरे को चुनेगी, या फिर संगठन और हाईकमान की प्राथमिकता अंतिम फैसला तय करेगी?

Admin Desk

Admin Desk

I am senior editor of this News Portal. Me and my team verify all news with trusted sources and publish here.

Home Shorts

Categories