तिरुवनंतपुरम: केरल में नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह से पहले कांग्रेस नेता और वरिष्ठ सांसद कोडिकुन्निल सुरेश के बयान ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।
उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस नीत यूडीएफ (United Democratic Front) एक दशक बाद फिर सत्ता में वापसी कर रही है और जनता ने बदलाव के पक्ष में जनादेश दिया है।
शपथ ग्रहण समारोह से पहले मीडिया से बातचीत में सुरेश ने कहा कि पिछले कई वर्षों से राज्य की जनता राजनीतिक बदलाव चाहती थी और इस बार लोगों ने कांग्रेस गठबंधन पर भरोसा जताया है।
उन्होंने इसे जनता की उम्मीदों और विश्वास की जीत बताया।
उनके बयान को केरल की राजनीति में कांग्रेस के लिए एक बड़े राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि राज्य में लंबे समय से यूडीएफ और वाम मोर्चा (LDF) के बीच सीधा मुकाबला रहा है।
कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं में उत्साह
नई सरकार के गठन को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है।
कई जगह समर्थकों ने जश्न मनाया और इसे “जनता की जीत” बताया।
कोडिकुन्निल सुरेश ने कहा कि नई सरकार का फोकस आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर रहेगा।
उन्होंने रोजगार, युवाओं के अवसर, महंगाई, सामाजिक योजनाओं और बुनियादी विकास को प्राथमिकता देने की बात कही।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि केरल में कांग्रेस की वापसी पार्टी के लिए राष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ा मनोबल बढ़ाने वाली मानी जा रही है।
केरल की राजनीति में क्यों अहम है यह बदलाव?
केरल देश के उन राज्यों में शामिल है जहां सत्ता अक्सर यूडीएफ और एलडीएफ के बीच बदलती रही है।
ऐसे में किसी भी चुनाव परिणाम को राष्ट्रीय राजनीति के नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि कांग्रेस गठबंधन मजबूत स्थिति में सरकार बनाता है, तो इसका असर दक्षिण भारत की राजनीति और विपक्षी रणनीति पर भी दिखाई दे सकता है।
हाल के वर्षों में कांग्रेस दक्षिण भारत के कई राज्यों में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है और केरल को उसका सबसे मजबूत गढ़ माना जाता है।
विपक्ष पर भी कांग्रेस का निशाना
कांग्रेस नेताओं ने संकेत दिए हैं कि पिछले वर्षों में जनता की कई उम्मीदें पूरी नहीं हो सकीं, जिसके कारण लोगों ने बदलाव का फैसला किया।
पार्टी नेताओं का कहना है कि नई सरकार “विकास और स्थिरता” पर काम करेगी और जनता से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी जाएगी।
राजनीतिक हलकों में अब सबसे ज्यादा चर्चा नई कैबिनेट, मुख्यमंत्री पद और सरकार की शुरुआती घोषणाओं को लेकर हो रही है।
राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ सकती है कांग्रेस की सक्रियता
विश्लेषकों का मानना है कि केरल में कांग्रेस की मजबूत वापसी विपक्षी दलों के लिए भी सकारात्मक संकेत हो सकती है।
लोकसभा चुनावों और आगामी विधानसभा चुनावों से पहले यह कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
फिलहाल राज्य में शपथ ग्रहण समारोह को लेकर तैयारियां तेज हैं और नई सरकार के गठन पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।