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ममता बनर्जी ने इस्तीफे से किया इनकार, INDIA गठबंधन मजबूत करने की बात कही

ममता बनर्जी ने इस्तीफे से किया इनकार, INDIA गठबंधन मजबूत करने की बात कही

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की करारी हार के एक दिन बाद पार्टी अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा देने से स्पष्ट इनकार कर दिया और कहा कि वह INDIA गठबंधन को मजबूत करने के लिए काम करेंगी।

अपने कालीघाट आवास पर आयोजित प्रेस वार्ता में ममता बनर्जी ने कहा, "मैं राजभवन नहीं जाऊँगी। मैंने हार नहीं मानी है, इसलिए इस्तीफा देने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता।" उन्होंने हार का दोष चुनाव आयोग और भाजपा पर मढ़ते हुए आरोप लगाया कि आयोग ने सत्तारूढ़ दल के इशारे पर काम किया।

उल्लेखनीय है कि सोमवार को घोषित परिणामों में भाजपा ने 293 में से 207 सीटें जीतकर पश्चिम बंगाल में पहली बार स्पष्ट बहुमत हासिल किया। तृणमूल कांग्रेस 2021 के 215 सीटों से घटकर मात्र 80 सीटों पर आ गई — यानी 135 सीटों का नुकसान। (Facebook)

भवानीपुर में हार  मुख्यमंत्री खुद 15,000 मतों से पराजित

सबसे उल्लेखनीय पराजय स्वयं ममता बनर्जी की रही, जो भवानीपुर सीट से भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी से 15,000 से अधिक मतों के अंतर से हार गईं। (Facebook) यह सीट इस चुनाव की सबसे अधिक चर्चित सीट थी।

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मतगणना के दौरान भवानीपुर की स्थिति कई बार बदली। प्रारंभिक रुझानों में ममता बनर्जी आगे थीं, लेकिन देर शाम तक पासा पलट गया। मतगणना केंद्र पर तनाव की स्थिति भी बनी जब ममता बनर्जी स्वयं वहाँ पहुँचीं और सुवेंदु अधिकारी पर मारपीट का आरोप लगाया। अधिकारी ने इस आरोप को निराधार बताया।अंतिम परिणाम घोषित होने पर ममता बनर्जी के करीब 63 प्रतिशत मंत्री भी चुनाव हार गए। 

ममता बनर्जी की प्रेस वार्ता  मुख्य बिंदु

प्रेस वार्ता में ममता बनर्जी के साथ भतीजे एवं पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी, वरिष्ठ नेता फिरहाद हाकिम, चंद्रिमा भट्टाचार्य, सोवंदेब चटर्जी और कल्याण बनर्जी उपस्थित थे।

ममता बनर्जी ने कहा कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी, अखिलेश यादव, हेमंत सोरेन और तेजस्वी यादव ने उनसे संपर्क किया है। उन्होंने कहा, "मैं एक आजाद पंछी हूँ। अब मेरा लक्ष्य स्पष्ट है मैं INDIA गठबंधन को मजबूत करूँगी।"

उन्होंने यह भी कहा मुझे कुर्सी की परवाह नहीं है। मैं जनता के लिए लड़ती रही हूँ और आगे भी लड़ती रहूँगी। मैं सड़कों पर लौटूँगी।

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यह पहली बार है जब ममता बनर्जी ने हार के बाद INDIA गठबंधन को मजबूत करने की बात कही। इससे पहले उनकी पार्टी के कई नेता कहते रहे थे कि ममता ही गठबंधन का नेतृत्व करने के लिए सबसे उपयुक्त व्यक्ति हैं।

हिमंता बिस्व सरमा की चेतावनी बर्खास्त होंगी

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने एक समाचार चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा कि अगर ममता बनर्जी इस्तीफा नहीं देतीं तो उन्हें बर्खास्त किया जाएगा।

उन्होंने कहा अगर वह इस्तीफा नहीं देंगी, तो वह बर्खास्त होंगी। देश उनकी इच्छा के अनुसार नहीं चलता। राज्यपाल कुछ समय प्रतीक्षा करेंगे और उसके बाद बर्खास्तगी होगी  यह उतना ही सरल है।

सरमा ने मतदाता सूची संशोधन विवाद पर भी कहा कि यह प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर हुई थी और न्यायालय ने चुनाव आयोग के पक्ष में फैसला दिया था।

राहुल गांधी का बदला रुख  चुनाव प्रचार और नतीजों के बाद का अंतर

उल्लेखनीय है कि चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी की कड़ी आलोचना की थी।

हालांकि नतीजों के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, "कुछ लोग TMC की हार पर प्रसन्न हो रहे हैं। उन्हें यह समझना होगा  बंगाल के जनादेश पर यह हमला भारतीय लोकतंत्र को नष्ट करने की भाजपा की व्यापक योजना का हिस्सा है। संकीर्ण राजनीति से ऊपर उठना होगा।"

इस बयान को राजनीतिक विश्लेषकों ने विपक्षी एकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव बुधवार को कोलकाता आकर ममता बनर्जी से मिलने वाले हैं।

संवैधानिक स्थिति  क्या ममता पद पर बनी रह सकती हैं?

ममता बनर्जी के इस्तीफे से इनकार के बाद संवैधानिक स्थिति को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इससे नई सरकार के गठन में कोई बाधा नहीं आएगी।

संविधान के अनुच्छेद 172 के तहत पश्चिम बंगाल की मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 7 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। इसके बाद मौजूदा सरकार का संवैधानिक अस्तित्व बिना किसी औपचारिक इस्तीफे के भी स्वतः समाप्त हो जाएगा। 

अनुच्छेद 164 के तहत मुख्यमंत्री और उनके मंत्री राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद पर बने रहते हैं। राज्यपाल मौजूदा मुख्यमंत्री के इस्तीफे के बगैर भी नई विधानसभा में नई सरकार का मुख्यमंत्री नियुक्त कर सकते हैं। 

अगर ममता बनर्जी नई विधानसभा में भी पद पर बने रहने का प्रयास करती हैं तो पहला कदम होगा  विश्वास मत। भाजपा के 207 बनाम तृणमूल के 80 के अनुपात को देखते हुए परिणाम पूर्वनिर्धारित है। विश्वास मत में विफल रहने के बाद मुख्यमंत्री संवैधानिक रूप से पद छोड़ने के लिए बाध्य होंगी। 

और अगर इसके बाद भी वह पद नहीं छोड़तीं, तो राज्यपाल अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेजकर राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर सकते हैं। इसके बाद विधानसभा को भंग या स्थगित किया जा सकता है और राज्य का सीधा नियंत्रण केंद्र सरकार के पास चला जाएगा। 

वरिष्ठ अधिवक्ता सुधीर कुमार के अनुसार ममता बनर्जी का इस्तीफा न देना महज एक राजनीतिक विरोध हो सकता है, लेकिन कानूनी और संवैधानिक दृष्टि से इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

भाजपा की अगली तैयारी  9 मई को शपथ की संभावना

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को बंगाल में सरकार गठन प्रक्रिया का पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। भाजपा ने राज्य में अपने विधायक दल का नेता चुनने की तैयारियाँ तेज कर दी हैं। 

सूत्रों के अनुसार सुवेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में हैं। 9 मई को रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती के अवसर पर नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जा सकता है। 

मुस्लिम मतों का विभाजन  पराजय की एक प्रमुख वजह

विश्लेषकों के अनुसार इस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार का एक प्रमुख कारण मुस्लिम मतों का विभाजन था। जो मत पहले एकजुट होकर तृणमूल को जाते थे, वे इस बार कई दलों में बिखर गए।

सुवेंदु अधिकारी ने अपनी जीत के बाद कहा कि उन्हें CPM के भी लगभग 10,000 मत प्राप्त हुए। इससे संकेत मिलता है कि परिवर्तन की माँग केवल किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं थी।

 तीन बार की सत्ता का अंत

ममता बनर्जी 2011 से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री थीं। उन्होंने 34 वर्षों के वाम मोर्चे के शासन को समाप्त करके सत्ता में प्रवेश किया था और 2016 तथा 2021 में पुनः जीत हासिल की थी।

2021 के चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम सीट से सुवेंदु अधिकारी से मामूली अंतर से हार के बावजूद बहुमत हासिल किया था। इस बार स्थिति पूरी तरह विपरीत रही।

आगे की स्थिति

7 मई को विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद राज्यपाल आर एन रवि विधानसभा को भंग कर नई सरकार के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ाएंगे। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रक्रिया में ममता बनर्जी के इस्तीफे से इनकार का कोई संवैधानिक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को समाप्त होने के साथ ही पंद्रह वर्षों के तृणमूल शासन का भी संवैधानिक अंत हो जाएगा। इसके बाद राज्यपाल सबसे बड़े दल के रूप में भाजपा को सरकार बनाने का निमंत्रण देंगे।

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