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16% आर्थिक वृद्धि 9 लाख करोड़ का निवेश फिर भी हार MK Stalin

16% आर्थिक वृद्धि  9 लाख करोड़ का निवेश फिर भी हार  MK Stalin

चेन्नई। Reddit पर एक post इन दिनों खूब वायरल हो रही है। उसमें MK Stalin की उपलब्धियाँ गिनाई गई हैं और नीचे लिखा है यह इंसान इस बात का सबूत है कि भारत में विकास से वोट नहीं मिलते।

यह post एक मजाक की तरह दिखती है। लेकिन इसके पीछे एक बहुत गहरा और असली सवाल छुपा है  जो सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, पूरे भारत की राजनीति का सवाल है।

क्या सच में विकास से वोट नहीं मिलते ?

तमिलनाडु ने 2024-25 में 11.19 प्रतिशत की वास्तविक आर्थिक वृद्धि दर्ज की — जो 14 सालों में सबसे ज्यादा है। मौजूदा कीमतों पर यह 16 प्रतिशत की नाममात्र वृद्धि थी जो राष्ट्रीय औसत 6.5 प्रतिशत से कहीं ज्यादा थी। 2021 से 2023 के बीच तमिलनाडु सरकार ने 9.74 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित किया और 31 लाख नए रोजगार बनाए। 

अगस्त 2025 में वियतनामी कंपनी VinFast ने तूतुकुडी में 16,000 करोड़ रुपये का कारखाना खोला। फरवरी 2026 में Tata Motors और Jaguar Land Rover ने रानीपेट में 9,000 करोड़ रुपये का कारखाना लगाया। 

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तमिलनाडु का निर्यात चार सालों में दोगुना हो गया  2020-21 में 26 अरब डॉलर से बढ़कर 2024-25 में 52 अरब डॉलर। 

प्रति व्यक्ति आय 3.62 लाख रुपये राष्ट्रीय औसत से 1.77 गुना ज्यादा। 38 में से 32 जिलों में प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत से ज्यादा। यह संख्याएं कागज पर नहीं जमीन पर दिखती हैं। फिर भी हार हुई।

तो फिर हार क्यों हुई ?

कारण 1 — GDP बढ़ी, पर क्या आम आदमी को फर्क पड़ा ? TVK की जीत के पीछे विश्लेषकों ने DMK सरकार के प्रति जन असंतोष को एक बड़ा कारण बताया। 

16 प्रतिशत GDP वृद्धि का मतलब यह नहीं कि हर घर में खुशहाली आई। यह वृद्धि ज्यादातर बड़े उद्योगों और निर्यात से आई। लेकिन चेन्नई का ऑटो चालक, कोयंबटूर का बुनकर और मदुरै का छोटा दुकानदार  इन्हें VinFast के कारखाने से क्या मिला ? जब GDP बढ़े लेकिन आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी नहीं बदले — तो वोट नहीं मिलता।

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कारण 2 — भ्रष्टाचार की छवि

DMK सरकार पर कई मंत्रियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगे। चाहे वो सच हों या न हों  छवि बन गई। और राजनीति में छवि ही सब कुछ होती है।

कारण 3 — विजय का वादा  बदलाव

विश्लेषकों के अनुसार TVK की जीत किसी विचारधारा की जीत नहीं थी यह बदलाव की चाहत की जीत थी। युवाओं, महिलाओं और पहली बार वोट देने वालों ने विजय को इसलिए नहीं चुना कि वो बेहतर नेता हैं  बल्कि इसलिए कि वो नए हैं। यह एक खतरनाक सच है। लोग कभी-कभी जाने-पहचाने अच्छे काम को नहीं  अनजाने बदलाव को चुनते हैं।

कारण 4 — MK Stalin खुद अपनी सीट हार गए

DMK के मुखिया MK Stalin कोलाथुर से हार गए  वो सीट जहाँ से वे लगातार तीन बार जीते थे। यह सबसे बड़ा संकेत था। जब नेता खुद अपनी सीट नहीं बचा पाता तो इसका मतलब है कि जमीनी संपर्क कहीं टूट गया था।

क्या यह सिर्फ तमिलनाडु की कहानी है ?

2004 का India Shining अटल बिहारी वाजपेयी भाजपा ने India Shining का नारा दिया। GDP बढ़ रही थी, परमाणु परीक्षण हो चुके थे, राजमार्ग बन रहे थे। फिर भी हार हुई। कारण  आम आदमी को यह "चमक" नहीं दिखी।

2015  दिल्ली में शीला दीक्षित

15 साल तक दिल्ली को बेहतरीन बिजली और पानी दिया। फिर भी 2015 में 70 में से 67 सीटें केजरीवाल ने जीत लीं।

2023 मध्यप्रदेश में कमलनाथ

15 महीने में कई योजनाएं लाईं फिर भी हार हुई। पैटर्न एक जैसा है।

तो क्या विकास बेकार है?

यह निष्कर्ष गलत होगा। विकास जरूरी है  लेकिन अकेला काफी नहीं। भारत में चुनाव जीतने के लिए तीन चीजें एक साथ चाहिए

पहली — विकास जो दिखे

GDP की संख्या नहीं  सड़क, अस्पताल, स्कूल जो आम आदमी हर रोज देखे और महसूस करे।

दूसरी — जमीनी संपर्क

नेता को अपने वोटरों के घर तक पहुँचना होता है। कारखाने के उद्घाटन की तस्वीर काफी नहीं  गली की नाली ठीक होनी चाहिए।

तीसरी — भरोसा

लोग उसे वोट देते हैं जिस पर भरोसा करते हैं। यह भरोसा एक दिन में नहीं बनता और एक गलती में टूट जाता है।

तमिलनाडु की बेरोजगारी दर 3.5 प्रतिशत थी राष्ट्रीय औसत से बेहतर। महंगाई 2.3 प्रतिशत  राष्ट्रीय स्तर से बहुत कम।  यानी आर्थिक तस्वीर सच में अच्छी थी।

लेकिन post यह नहीं बताती कि DMK के कई मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के आरोप थे। यह नहीं बताती कि Stalin की सरकार आम लोगों को दूर लगने लगी थी। यह नहीं बताती कि विजय ने जो "बदलाव का वादा" किया  वो एक भावनात्मक लहर थी जिसे कोई आँकड़ा नहीं रोक सकता।

MK Stalin के लिए एक न्यायसंगत आकलन

Stalin एक ईमानदार और काम करने वाले मुख्यमंत्री थे  इसमें दो राय नहीं। उनके कार्यकाल में तमिलनाडु सच में आगे बढ़ा। लेकिन राजनीति में सिर्फ काम करना काफी नहीं  काम दिखना भी चाहिए। और लोगों तक पहुँचना भी चाहिए। इतिहास में यह पहला मौका था जब कोई गैर-द्रविड़ पार्टी तमिलनाडु में सबसे बड़ी पार्टी बनी।  यह सिर्फ विजय की जीत नहीं यह उस व्यवस्था के खिलाफ आवाज थी जो 59 साल से चली आ रही थी। और उस आवाज को कोई GDP का आँकड़ा नहीं दबा सकता था।

निष्कर्ष  भारत में वोट कैसे मिलता है

भारत में वोट मिलता है  भावना से, भरोसे से और बदलाव की उम्मीद से। विकास इन तीनों का आधार बन सकता है  लेकिन खुद में पर्याप्त नहीं है। MK Stalin की कहानी एक चेतावनी है हर उस नेता के लिए जो सोचता है कि अच्छे काम के बदले में वोट मिलना तय है। काम करो  जरूर। लेकिन लोगों से जुड़े भी रहो। क्योंकि जिस दिन आम आदमी को लगा कि नेता उससे दूर हो गया  उस दिन GDP का कोई आँकड़ा काम नहीं आएगा।

Admin Desk

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