इस्लामाबाद पाकिस्तान इस वक्त अपने इतिहास के सबसे बुरे आर्थिक और राजनीतिक दौर से गुजर रहा है। पिछले 24 घंटों में जो कुछ भी इस्लामाबाद की गलियों से लेकर कराची के तटों तक हुआ, उसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। जनता के जबरदस्त विद्रोह और सड़कों पर मचे बवाल के बाद आखिरकार शहबाज शरीफ सरकार को अपना फैसला पलटना पड़ा है। सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए पेट्रोल की कीमतों में 80 रुपये प्रति लीटर की भारी कटौती का ऐलान किया है।
1. फैसले की पूरी कहानी: 24 घंटे का हाई-वोल्टेज ड्रामा
कहानी शुरू होती है एक दिन पहले, जब सरकार ने एक झटके में पेट्रोल के दाम 458.40 रुपये और डीजल के दाम 520.35 रुपये प्रति लीटर कर दिए थे। इस खबर के आते ही पूरे पाकिस्तान में मानो बिजली गिर गई। महंगाई से पहले ही त्रस्त जनता का गुस्सा फूट पड़ा।
विरोध प्रदर्शन: लाहौर, रावलपिंडी और पेशावर जैसे शहरों में लोग सड़कों पर उतर आए। कई जगहों पर टायर जलाकर रास्ते जाम कर दिए गए।
पंपों पर अफरा-तफरी: जैसे ही दाम बढ़ने की खबर फैली, पेट्रोल पंपों पर किलोमीटर लंबी लाइनें लग गईं और कई जगह हिंसक झड़पें भी देखने को मिलीं।
इसी दबाव के बीच देर रात कैबिनेट की बैठक हुई और सुबह होते-होते नई कीमत 378 रुपये प्रति लीटर तय कर दी गई।
2. मोटरसाइकिल और मध्यम वर्ग के लिए 'स्पेशल पैकेज'
सिर्फ कीमत घटाना ही काफी नहीं था, सरकार ने डैमेज कंट्रोल के लिए एक और बड़ा कार्ड खेला है। वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने मध्यम वर्ग को लुभाने के लिए सब्सिडी स्कीम लॉन्च की है:
किसे मिलेगी राहत: केवल बाइक और स्कूटर चालकों को।
कितनी राहत: अगले 3 महीने तक हर महीने 20 लीटर पेट्रोल पर 100 रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी।
उद्देश्य: सरकार का मानना है कि इससे दिहाड़ी मजदूरों और छोटे नौकरीपेशा लोगों को सीधी मदद मिलेगी।
3. सरकार का तर्क: "हमारा हाथ बंधा हुआ है"
पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सफाई देते हुए कहा कि कीमतें बढ़ाना उनकी खुशी नहीं, बल्कि मजबूरी थी। उनके मुताबिक:
वैश्विक युद्ध के हालात: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने मिडिल ईस्ट में कच्चे तेल की सप्लाई चेन को बाधित किया है।
आयात पर निर्भरता: पाकिस्तान अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह सऊदी अरब और यूएई पर निर्भर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है।
4. क्या ये राहत लंबे समय तक टिकेगी? (एक्सपर्ट ओपिनियन)
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि ₹80 की यह कटौती सरकार की ओर से लिया गया एक 'पॉलिटिकल रिस्क' है। पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार पहले ही खाली है। ऐसे में इतनी बड़ी कटौती और सब्सिडी का बोझ सरकारी खजाने पर भारी पड़ेगा। सवाल यह उठ रहा है कि क्या आईएमएफ (IMF) इस फैसले के बाद पाकिस्तान को मिलने वाले कर्ज पर रोक लगा देगा?
5. आम आदमी की राय
जब कुछ स्थानीय नागरिकों से बात की, तो उनका कहना है कि ₹80 की कटौती ऊंट के मुंह में जीरे जैसी है। आटा, दाल और बिजली के दाम अब भी आसमान छू रहे हैं। जनता को डर है कि कहीं सरकार कुछ दिनों बाद फिर से कीमतें न बढ़ा दे।
शहबाज सरकार ने फिलहाल के लिए जनता के गुस्से को ठंडा तो कर दिया है, लेकिन पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति अब भी एक 'टाइम बम' की तरह है। ₹378 लीटर पेट्रोल भी दुनिया के कई देशों के मुकाबले बहुत ज्यादा है। अब देखना यह होगा कि आने वाले हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें क्या रुख अपनाती हैं।