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पीएम मोदी का यूरोप दौरा शुरू नीदरलैंड्स के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी, स्वीडन-इटली में भी होंगी अहम बैठकें

पीएम मोदी का यूरोप दौरा शुरू नीदरलैंड्स के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी, स्वीडन-इटली में भी होंगी अहम बैठकें

 

द हेग/नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने बहुचर्चित यूरोप दौरे की शुरुआत नीदरलैंड्स से कर दी है। बदलते वैश्विक समीकरणों, पश्चिम एशिया संकट और दुनिया की आर्थिक चुनौतियों के बीच इस दौरे को भारत की बड़ी कूटनीतिक पहल माना जा रहा है।

अपने दौरे के पहले चरण में पीएम मोदी ने नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री रॉब जेटन, किंग विलेम-अलेक्जेंडर और क्वीन मैक्सिमा से मुलाकात की।

दोनों देशों ने आपसी रिश्तों को नई ऊंचाई देते हुए भारत-नीदरलैंड्स संबंधों को “स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” स्तर तक बढ़ाने का फैसला किया।

प्रधानमंत्री मोदी फिलहाल छह दिन के विदेश दौरे पर हैं। यह यात्रा संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से शुरू हुई थी और अब वे नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा करेंगे।

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इस दौरान वे यूरोप के कई बड़े नेताओं से मुलाकात करेंगे, जिनमें यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी भी शामिल हैं।

द हेग में पीएम मोदी का विशेष स्वागत

नीदरलैंड्स पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। द हेग स्थित Huis ten Bosch Palace में उन्होंने डच शाही परिवार से मुलाकात की।

इस दौरान दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और आर्थिक रिश्तों को और मजबूत करने पर चर्चा हुई।

पीएम मोदी ने वहां मौजूद भारतीय समुदाय को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत और नीदरलैंड्स के संबंध पिछले कुछ वर्षों में तेजी से मजबूत हुए हैं और दोनों देश अब केवल व्यापारिक साझेदार नहीं बल्कि रणनीतिक सहयोगी बन रहे हैं।

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उन्होंने अपने संबोधन में टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, ग्रीन एनर्जी और डिजिटल सहयोग को भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण साझेदारी बताया।

पीएम मोदी ने कहा कि भारत तेजी से दुनिया की बड़ी आर्थिक शक्ति बन रहा है और यूरोप के साथ मजबूत संबंध भारत की वैश्विक भूमिका को और मजबूत करेंगे।

भारत-नीदरलैंड्स के रिश्तों को नई दिशा

प्रधानमंत्री मोदी और डच प्रधानमंत्री रॉब जेटन के बीच हुई वार्ता को काफी अहम माना जा रहा है।

दोनों नेताओं ने रक्षा, सुरक्षा, ऊर्जा, व्यापार और तकनीकी सहयोग जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।

बैठक के बाद दोनों देशों ने अपने रिश्तों को “Strategic Partnership” स्तर तक बढ़ाने की घोषणा की।

इसका मतलब है कि अब दोनों देश केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेंगे बल्कि रक्षा, समुद्री सुरक्षा, साइबर टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर और वैश्विक रणनीतिक मुद्दों पर भी साथ काम करेंगे।

सूत्रों के अनुसार भारत और नीदरलैंड्स ने कई समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए हैं, जिनका उद्देश्य निवेश बढ़ाना और नई तकनीकों में साझेदारी को मजबूत करना है।

व्यापार और निवेश में लगातार बढ़ रही साझेदारी

नीदरलैंड्स यूरोप में भारत का एक बड़ा व्यापारिक साझेदार बन चुका है।

भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार दोनों देशों के बीच 2024-25 में लगभग 27.8 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ।

नीदरलैंड्स भारत में चौथा सबसे बड़ा विदेशी निवेशक भी है। अब तक डच कंपनियों ने भारत में लगभग 55.6 अरब डॉलर का निवेश किया है।

दोनों देशों के बीच बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स, कृषि तकनीक, जल प्रबंधन और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन पर यूरोप की निर्भरता कम करने की रणनीति के बीच भारत यूरोपीय देशों के लिए एक भरोसेमंद साझेदार बनकर उभर रहा है।

पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक राजनीति का असर

प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है।

तेल की कीमतों में उछाल, वैश्विक सप्लाई चेन पर असर और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अनिश्चितता ने दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की चिंता बढ़ा दी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत और यूरोपीय देशों के बीच बढ़ता सहयोग केवल आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है।

यूरोप अब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत को एक मजबूत और स्थिर शक्ति के रूप में देख रहा है।

स्वीडन में उर्सुला वॉन डेर लेयेन से होगी अहम मुलाकात

नीदरलैंड्स के बाद प्रधानमंत्री मोदी स्वीडन पहुंचेंगे। यहां वे स्वीडिश प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन से मुलाकात करेंगे और कई उच्चस्तरीय बैठकों में हिस्सा लेंगे।

स्वीडन दौरे का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ होने वाली बैठक मानी जा रही है।

दोनों leaders के बीच EU-India Free Trade Agreement को लेकर चर्चा हो सकती है।

यूरोपीय संघ और भारत के बीच लंबे समय से फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत चल रही है। इस समझौते के जरिए व्यापारिक बाधाओं को कम करने और निवेश बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक टेक्नोलॉजी, क्लीन एनर्जी, सप्लाई चेन और डिजिटल इकोनॉमी जैसे विषय भी बैठक में प्रमुख रहेंगे।

नॉर्डिक देशों के साथ भारत का बढ़ता सहयोग

स्वीडन के बाद प्रधानमंत्री मोदी नॉर्वे की राजधानी ओस्लो जाएंगे, जहां वे तीसरे India-Nordic Summit में हिस्सा लेंगे।

इस सम्मेलन में नॉर्वे, स्वीडन, डेनमार्क, फिनलैंड और आइसलैंड के नेता शामिल होंगे।

इन देशों के साथ भारत के संबंध पिछले कुछ वर्षों में तेजी से मजबूत हुए हैं।

खासतौर पर ग्रीन टेक्नोलॉजी, नवीकरणीय ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रक्षा और अंतरिक्ष तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ रहा है।

Arctic Region यानी उत्तरी ध्रुव क्षेत्र भी इस बैठक का अहम मुद्दा रहेगा। जलवायु परिवर्तन और नई समुद्री व्यापारिक संभावनाओं के कारण आर्कटिक क्षेत्र वैश्विक राजनीति में तेजी से महत्वपूर्ण बनता जा रहा है।

इटली में जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात के साथ दौरा समाप्त

प्रधानमंत्री मोदी अपने यूरोप दौरे के अंतिम चरण में इटली जाएंगे। यहां वे इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात करेंगे।

भारत और इटली के बीच पिछले कुछ वर्षों में रिश्ते तेजी से मजबूत हुए हैं।

2024 में दोनों देशों ने “Joint Strategic Action Plan” पर सहमति जताई थी, जिसके तहत रक्षा, सुरक्षा, व्यापार और माइग्रेशन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया गया था।

सूत्रों का कहना है कि दोनों नेता रक्षा उत्पादन, समुद्री सुरक्षा और सुरक्षित माइग्रेशन चैनल जैसे मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं।

भारत की वैश्विक भूमिका लगातार मजबूत

विशेषज्ञों के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा केवल एक सामान्य विदेशी यात्रा नहीं बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का संकेत है।

आज भारत:

  • दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है
  • इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अहम रणनीतिक शक्ति बन चुका है
  • यूरोप और पश्चिमी देशों के लिए बड़ा बाजार और भरोसेमंद साझेदार है
  • टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग का उभरता वैश्विक केंद्र बन रहा है

यही कारण है कि यूरोप के कई देश अब भारत के साथ दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को प्राथमिकता दे रहे हैं।

आने वाले दिनों में पीएम मोदी की स्वीडन, नॉर्वे और इटली में होने वाली बैठकों पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी, क्योंकि इन बैठकों से वैश्विक व्यापार, टेक्नोलॉजी और भू-राजनीति की दिशा पर बड़ा असर पड़ सकता है।

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