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व्यापार समझौतों के साथ नए स्वर्ण युग में भारत-नॉर्डिक संबंध ओस्लो शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी का बड़ा ऐलान

व्यापार समझौतों के साथ नए स्वर्ण युग में भारत-नॉर्डिक संबंध ओस्लो शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी का बड़ा ऐलान

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में आयोजित तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन (3rd India-Nordic Summit) में भारत और नॉर्डिक देशों को "स्वाभाविक भागीदार" (Natural Partners) बताया है. पीएम मोदी ने कहा कि साझा लोकतांत्रिक मूल्य, कानून का शासन और बहुपक्षवाद के प्रति प्रतिबद्धता दोनों पक्षों को आपस में जोड़ती है. इस ऐतिहासिक बैठक के दौरान भारत और पांच नॉर्डिक देशों (नॉर्वे, स्वीडन, डेनमार्क, फिनलैंड और आइसलैंड) ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाते हुए 'ग्रीन टेक्नोलॉजी और इनोवेशन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' (Green Technology and Innovation Strategic Partnership) शुरू करने का बड़ा ऐलान किया है.

Photo credit: DDNEWS

 

चार गुना बढ़ा द्विपक्षीय व्यापार आर्थिक सहयोग के ऐतिहासिक आंकड़े

शिखर सम्मेलन के बाद संयुक्त प्रेस वक्तव्य को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने नॉर्डिक देशों के साथ बढ़ते आर्थिक सहयोग के महत्वपूर्ण डेटा साझा किए. पीएम मोदी ने रेखांकित किया कि पिछले एक दशक में भारत और नॉर्डिक देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग चार गुना (Nearly Quadrupled) बढ़ चुका है. इसके साथ ही, इसी अवधि के दौरान नॉर्डिक देशों से भारत में होने वाले निवेश में भी करीब 200 प्रतिशत (Nearly 200%) की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. प्रधानमंत्री ने कहा कि इस मजबूत आर्थिक रिश्ते ने जहां एक तरफ भारत के आर्थिक विकास को गति दी है, वहीं दूसरी तरफ नॉर्डिक देशों की अर्थव्यवस्थाओं में भी हजारों रोजगार पैदा किए हैं.

ऐतिहासिक व्यापार समझौतों से खुलेगा 'स्वर्ण युग
प्रधानमंत्री मोदी ने हालिया और जारी व्यापार समझौतों का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए इन्हें दोनों क्षेत्रों के संबंधों के लिए गेम-चेंजर बताया:
  • TEPA समझौता: नॉर्वे और आइसलैंड सहित EFTA (यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन) देशों के साथ हुआ 'ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट' (TEPA) व्यापार बाधाओं को दूर करेगा.
  • India-EU FTA: डेनमार्क, फिनलैंड और स्वीडन को शामिल करने वाला 'भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता' (FTA) लचीली सप्लाई चेन को मजबूत करेगा और निवेश के नए रास्ते खोलेगा.

ग्रीन टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप किस देश की विशेषज्ञता से जुड़ेगा भारत?

इस शिखर सम्मेलन की सबसे बड़ी उपलब्धि भारत-नॉर्डिक ग्रीन टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की शुरुआत रही. इसके तहत नॉर्डिक देशों की विशेष तकनीकी विशेषज्ञता को भारत के बड़े बाजार, कुशल टैलेंट और स्केल (पैमाने) के साथ जोड़ा जाएगा. इस रणनीतिक साझेदारी के तहत अनुसंधान और नवाचार (Research & Innovation) एक प्रमुख स्तंभ रहेगा, जिसके माध्यम से दोनों पक्षों के विश्वविद्यालयों, प्रयोगशालाओं और स्टार्ट-अप इकोसिस्टम को आपस में जोड़ा जाएगा.

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वैल्यू-एडिशन डेटा: भारत-नॉर्डिक देशों की रणनीतिक साझेदारी का पूरा खाका

इस शिखर सम्मेलन में तय किए गए सहयोग के क्षेत्रों और प्रत्येक नॉर्डिक देश की कोर विशेषज्ञता का विस्तृत विवरण नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट किया गया है:

नॉर्डिक देश शासनाध्यक्ष (Prime Minister) कोर तकनीकी विशेषज्ञता (Expertise) भारत के साथ सहयोग का मुख्य क्षेत्र
नॉर्वे (Norway) जोनास गहर स्ट्रो (Jonas Gahr Støre) ब्लू इकोनॉमी, समुद्री क्षेत्र और पोलर रिसर्च आर्कटिक सहयोग, सतत समुद्री व्यापार और मत्स्य पालन.
स्वीडन (Sweden) उल्फ क्रिस्टरसन (Ulf Kristersson) एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और रक्षा तकनीक मेक इन इंडिया के तहत रक्षा उत्पादन और भारी औद्योगिक नवाचार.
फिनलैंड (Finland) पेटेरी ओर्पो (Petteri Orpo) दूरसंचार (Telecom) और डिजिटल टेक्नोलॉजी 5G/6G तकनीक, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर.
डेनमार्क (Denmark) मेटे फ्रेडरिक्सन (Mette Frederiksen) साइबर सुरक्षा और हेल्थ-टेक (Health-Tech) डिजिटल सुरक्षा प्रणाली, स्वास्थ्य तकनीक और पर्यावरण अनुकूल समाधान.
आइसलैंड (Iceland) क्रिस्टुन फ्रॉस्टाडोटिर (Kristrun Frostadottir) जियोथर्मल (भू-तापीय) ऊर्जा और मत्स्य पालन क्लीन एनर्जी के तहत भू-तापीय ऊर्जा संयंत्र और आधुनिक फूड प्रोसेसिंग.
 

वैश्विक मुद्दों पर एकजुटता आतंकवाद पर 'नो डबल स्टैंडर्ड्स

वैश्विक शांति और सुरक्षा के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत और नॉर्डिक देश एक नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था (Rules-based International Order) का समर्थन करते हैं. दोनों पक्षों ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया (यूक्रेन-रूस और इजरायल संकट) सहित दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी संघर्षों को समाप्त करने और शांति बहाल करने के प्रयासों का समर्थन करने की बात कही. इसके अलावा, पीएम मोदी ने बहुपक्षीय संस्थानों (जैसे संयुक्त राष्ट्र) में तत्काल सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया और आतंकवाद के खिलाफ एक कड़ा संदेश देते हुए कहा, "आतंकवाद पर कोई समझौता नहीं हो सकता और न ही कोई दोहरा मापदंड (Double Standards) स्वीकार किया जा सकता है."

पब्लिक इम्पैक्ट (इस शिखर सम्मेलन और समझौतों का आम जनता पर क्या असर होगा?)

भारत और नॉर्डिक देशों की इस महाडील का सीधा असर आने वाले समय में देश के युवाओं, उद्योग जगत और पर्यावरण पर देखने को मिलेगा:

  • रोजगार के नए अवसर और टैलेंट मोबिलिटी: कौशल विकास (Skill Development) और टैलेंट मोबिलिटी समझौते के कारण भारतीय पेशेवरों, शोधकर्ताओं और छात्रों के लिए स्वीडन, नॉर्वे और फिनलैंड जैसे देशों में काम करने और उच्च शिक्षा पाने के रास्ते बेहद आसान हो जाएंगे.
  • सस्ती और स्वच्छ बिजली (Clean Energy): आइसलैंड की जियोथर्मल तकनीक और नॉर्डिक देशों के सस्टेनेबिलिटी मॉडल्स के भारत में आने से देश के रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा, जिससे भविष्य में आम उपभोक्ताओं को स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा मिल सकेगी.
  • स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा: भारत के विशाल स्टार्ट-अप इकोसिस्टम को नॉर्डिक देशों की उन्नत प्रयोगशालाओं और रिसर्च लिंकेज से जोड़ा जाएगा, जिससे भारतीय टेक स्टार्ट-अप्स को अंतरराष्ट्रीय फंडिंग और वैश्विक तकनीक तक सीधी पहुंच मिलेगी.
  • सस्ती हेल्थ-टेक सुविधाएं: डेनमार्क की हेल्थ-टेक विशेषज्ञता और भारत के बड़े पैमाने (Scale) के मिलन से देश में आधुनिक और सस्ती चिकित्सा तकनीकें विकसित होंगी, जिसका सीधा लाभ आम मरीजों को मिलेगा.

शिखर सम्मेलन की पृष्ठभूमि और पीएम मोदी का दौरा

गौरतलब है कि भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन की शुरुआत साल 2018 में स्टॉकहोम (स्वीडन) से हुई थी, जिसके बाद दूसरा सम्मेलन 2022 में कोपेनहेगन (डेनमार्क) में आयोजित किया गया था. वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पांच देशों के विस्तृत दौरे (यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली) पर हैं, जिसमें नॉर्वे चौथा पड़ाव था और इसके बाद वे इटली के लिए रवाना होंगे. यह पिछले चार दशकों (40 से अधिक वर्षों) में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली नॉर्वे यात्रा है, जो इस क्षेत्र के प्रति भारत की बढ़ती रणनीतिक प्राथमिकताओं को दर्शाती है.

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