महाराष्ट्र के पुणे जिले के भोर तहसील के नासरपुर गांव में 1 मई 2026 को एक ऐसी घटना हुई जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। एक 65 साल के बुजुर्ग ने 4 साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और फिर उसकी हत्या कर दी। सबसे दर्दनाक बात यह है कि आरोपी पहले भी इसी तरह के अपराध कर चुका था और जमानत पर बाहर था।
घटना कैसे हुई
4 साल की बच्ची गर्मियों की छुट्टियों में अपनी नानी के घर नासरपुर गांव आई हुई थी। उसके माता-पिता पुणे शहर में काम करते हैं, पिता हिंदू पुजारी हैं और मां एक निजी कंपनी में नौकरी करती हैं। बच्ची स्कूल की गर्मी छुट्टी शुरू होने के दस दिन पहले ही नानी के पास आई थी। उसकी छोटी बहन पिछले दो महीनों से वहीं रह रही थी।
1 मई की शाम करीब 6:15 बजे बच्ची घर के बाहर खेल रही थी। आरोपी भीमराव कांबले ने उसे बछड़ा दिखाने के बहाने गौशाले की तरफ ले गया। शाम को जब बच्ची घर नहीं लौटी तो नानी के पड़ोसी ने माता-पिता को फोन किया। तत्काल तलाशी शुरू हुई। रात 8 बजे माता-पिता गांव पहुंचे, लेकिन जो देखा उससे रूह कांप उठी। बच्ची का शव गौशाले में गोबर के ढेर के नीचे दबा मिला। फोरेंसिक जांच ने दुष्कर्म और पत्थर से हत्या की पुष्टि की।
आरोपी कौन है और कैसे पकड़ा गया
आरोपी भीमराव कांबले (65) उसी इलाके का रहने वाला मजदूर है। पुलिस को पास के एक घर के CCTV फुटेज में बच्ची के साथ उसकी तस्वीर मिली और उसे सूचना मिलने के एक घंटे के अंदर गिरफ्तार कर लिया गया।
पुणे ग्रामीण पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल ने खुलासा किया कि आरोपी के खिलाफ पहले से दो ऐसे ही मामले दर्ज हैं, जिनमें 2015 का एक POCSO केस भी शामिल है। वह जमानत पर बाहर था। इसी बात ने लोगों के गुस्से को और भड़काया, यह सवाल उठने लगा कि बच्चों के खिलाफ अपराध करने वाला बार-बार का अपराधी खुलेआम समाज में घूम रहा था, किसी की नजर क्यों नहीं गई।
आरोपी को अदालत ने 7 मई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। उस पर भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के साथ POCSO एक्ट के तहत केस दर्ज है।
गांव से हाईवे तक फैला विरोध
घटना की खबर फैलते ही नासरपुर और आसपास के गांवों में तूफान आ गया। सैकड़ों ग्रामीण रात को ही राजगड पुलिस स्टेशन के सामने जमा हो गए और पुणे-सतारा हाईवे जाम कर दिया जो मुंबई-बेंगलुरु नेशनल हाईवे का हिस्सा है। 2 मई को नासरपुर में पूर्ण बंद रहा, दुकानें और स्कूल सब बंद रहे। प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा।
3 मई को भोर और राजगड तहसीलों में फिर से बंद का ऐलान हुआ। सोशल मीडिया पर एक पोस्टर वायरल हुआ जिसमें पूरे पुणे में विरोध की अपील की गई। शनिवार को सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने मुंबई-बेंगलुरु हाईवे को करीब 4 घंटे तक जाम रखा जिससे ट्रैफिक पूरी तरह ठप हो गया।
पीड़िता के पिता की अपील
पिता बेटी की अस्थियां विसर्जित करने देहू गए हुए थे। उन्होंने एक वीडियो जारी कर नेताओं से अपील की कि जब तक आरोपी को फांसी नहीं होती, कोई भी नेता उनके घर शोक व्यक्त करने न आए। उन्होंने कहा कि वे अपने परिवार से मिलने के लिए किसी को भी तब तक मंजूरी नहीं देंगे जब तक न्याय नहीं मिल जाता।
नेताओं की प्रतिक्रिया
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि उन्होंने पीड़िता के पिता से दो बार बात की है और सरकार फास्ट-ट्रैक कोर्ट में रिकॉर्ड समय में मुकदमा पूरा कराएगी और आरोपी को फांसी दिलाने की मांग करेगी। एक विशेष सरकारी वकील नियुक्त किया जाएगा।
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने स्वतः संज्ञान लेते हुए तत्काल POCSO के तहत चार्जशीट दाखिल करने की मांग की।
शिवसेना (UBT) के विधायक आदित्य ठाकरे ने सवाल उठाया कि जब आरोपी बार-बार का अपराधी था तो सिस्टम क्या इंतजार कर रहा था, कोई और घटना होने का।
सवाल जो उठ रहे हैं
यह मामला सिर्फ एक जघन्य अपराध नहीं है बल्कि व्यवस्था की गहरी खामियों को भी उजागर करता है। जब कोई व्यक्ति POCSO जैसे गंभीर मामले में जमानत पर बाहर आ जाता है और फिर वही अपराध दोहराता है तो सवाल उठता है कि ऐसे अपराधियों की निगरानी क्यों नहीं होती। पुणे के एक वकील ने कहा कि भारत में जमानत मिलने के बाद अपराधी समाज में घुल-मिल जाते हैं और उनकी कोई ट्रैकिंग नहीं होती।
महाराष्ट्र में लंबे समय से लंबित शक्ति अधिनियम, जो ऐसे अपराधों में तेज और कड़ी सजा का प्रावधान करता, अब तक लागू नहीं हो पाया है। यह मामला उस कानून को जल्द लागू करने की मांग को भी नई धार दे रहा है।
जांच जारी फोरेंसिक टीम का काम पूरा
पुलिस के मुताबिक फोरेंसिक टीम क्राइम सीन की जांच पूरी कर चुकी है। आरोपी से पूछताछ जारी है और किसी संभावित साथी की भी जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि चार्जशीट पूरी तरह मजबूत बनाई जाएगी ताकि आरोपी को कोर्ट में कड़ी से कड़ी सजा मिल सके।