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टीकाकरण: हर पीढ़ी की सुरक्षा और एक स्वस्थ भविष्य का संकल्प

टीकाकरण: हर पीढ़ी की सुरक्षा और एक स्वस्थ भविष्य का संकल्प

दुनिया भर में चिकित्सा विज्ञान ने कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं, लेकिन 'टीकाकरण' या इम्यूनाइजेशन को आज भी मानव इतिहास के सबसे सफल और प्रभावी स्वास्थ्य हस्तक्षेपों में से एक माना जाता है। पिछले 50 वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो टीकों ने वैश्विक स्तर पर लगभग 15.4 करोड़ लोगों का जीवन बचाया है। अकेले दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में ही टीकाकरण की वजह से करीब 3.8 करोड़ मौतें टाली जा सकी हैं।

बावजूद इसके, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने हाल ही में चेतावनी जारी की है कि यदि टीकाकरण के प्रयासों में ढील दी गई, तो कई ऐसी बीमारियां जो लगभग समाप्त हो चुकी थीं, वे दोबारा पैर पसार सकती हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया और पश्चिमी प्रशांत क्षेत्रों में करोड़ों बच्चे अभी भी अपनी नियमित खुराक से वंचित हैं, जो एक गंभीर चिंता का विषय है।

टीकाकरण की वर्तमान स्थिति

पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र, जहाँ दुनिया की एक चौथाई आबादी रहती है, वहां 2024 में लगभग 21 लाख बच्चे कम से कम एक टीके की खुराक लेने से चूक गए। इसी तरह, दक्षिण-पूर्व एशिया में लगभग 19 लाख बच्चे 'जीरो-डोज' की श्रेणी में आते हैं, जिसका अर्थ है कि उन्हें जीवन रक्षक टीकों की एक भी खुराक नहीं मिली है। दुर्गम ग्रामीण इलाके, शहरों की झुग्गी-बस्तियां और सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच आज भी एक बड़ी बाधा है।

 प्रवासी आबादी और शरणार्थी शिविरों में रहने वाले बच्चों का रिकॉर्ड रखना और उन्हें समय पर टीका लगाना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।

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 मीडिया और अन्य माध्यमों से फैलने वाली गलत जानकारी के कारण कुछ समुदायों में टीकों के प्रति डर या झिझक बनी रहती है।

 जलवायु परिवर्तन, तेजी से होता शहरीकरण और स्वास्थ्य बजट पर दबाव के कारण टीकाकरण अभियान की निरंतरता बनाए रखना कठिन हो रहा है।

 क्यों जरूरी है हर खुराक ?

टीकाकरण न केवल व्यक्तिगत सुरक्षा प्रदान करता है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए एक सुरक्षा कवच (हर्ड इम्युनिटी) तैयार करता है।

1. मृत्यु दर में कमी

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दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में टीकाकरण कार्यक्रमों के कारण शिशु मृत्यु दर में 22% की महत्वपूर्ण कमी आई है। खसरा, रूबैल्ला, पोलियो और टिटनेस जैसी बीमारियों से होने वाली मौतों को रोकने में टीके सबसे सफल रहे हैं।

2. बीमारियों का उन्मूलन

दशकों के प्रयास के बाद 2014 से दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र को पोलियो मुक्त बनाए रखा गया है। साथ ही, मातृ एवं नवजात टिटनेस को भी जड़ से खत्म करने में बड़ी सफलता मिली है। वर्तमान में खसरा और रूबैल्ला को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में तेजी से काम चल रहा है।

3. नए टीकों का समावेश

शुरुआती दौर में टीकाकरण कार्यक्रम केवल 6 बीमारियों तक सीमित थे, लेकिन अब इनमें 13 अलग-अलग बीमारियों के एंटीजन शामिल हैं। इनमें सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए एचपीवी (HPV) वैक्सीन, निमोनिया के लिए न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन और रोटावायरस जैसे आधुनिक टीके शामिल हैं।

 सावधानी क्यों जरूरी है ?

WHO के अनुसार, टीकाकरण कवरेज में मामूली सी गिरावट भी बड़े प्रकोप (Outbreak) का कारण बन सकती है। उदाहरण के तौर पर, बांग्लादेश में हाल ही में सामने आए खसरे के मामले यह दर्शाते हैं कि यदि बच्चे समय पर टीका नहीं लगवाते, तो संक्रमण कितनी तेजी से फैल सकता है।

पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. साइया माउ पिउकला का कहना है कि "टीके विज्ञान का चमत्कार हैं, लेकिन हम इस सुरक्षा को हल्के में नहीं ले सकते।" यदि नियमित टीकाकरण प्रणालियों को मजबूत नहीं किया गया और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को सुचारू नहीं रखा गया, तो पिछली सफलताओं पर पानी फिर सकता है।

स्वास्थ्य सुरक्षा और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR)

टीकाकरण का एक कम चर्चित लेकिन महत्वपूर्ण लाभ यह है कि यह एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) से लड़ने में मदद करता है। जब टीके के माध्यम से संक्रमण को पहले ही रोक दिया जाता है, तो एंटीबायोटिक दवाओं की आवश्यकता कम हो जाती है। इससे बैक्टीरिया में दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने का खतरा कम हो जाता है, जो भविष्य की वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।

टीकाकरण की सफलता केवल विज्ञान पर नहीं, बल्कि 'समानता' पर टिकी है। जब तक समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक वैक्सीन नहीं पहुंचती, तब तक कोई भी सुरक्षित नहीं है।

 उन क्षेत्रों की पहचान करना जहां टीकाकरण की दर कम है और वहां लक्षित अभियान चलाना।

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मी सूचना के सबसे भरोसेमंद स्रोत हैं। वे परिवारों को सही जानकारी देकर टीकों के प्रति विश्वास बहाली में मुख्य भूमिका निभाते हैं।

 अब केवल बच्चों के टीकाकरण पर ही नहीं, बल्कि किशोरों, वयस्कों और बुजुर्गों के लिए भी टीकाकरण के विस्तार की आवश्यकता है ताकि बदलती जनसांख्यिकी और स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।

टीकाकरण के लाभ और व्यावहारिक सुझाव

टीकाकरण केवल एक मेडिकल प्रक्रिया नहीं, बल्कि आपके परिवार के भविष्य में किया गया एक निवेश है। यहाँ कुछ व्यावहारिक सुझाव दिए गए हैं जिन्हें हर परिवार को अपनाना चाहिए:

 टीकाकरण कार्ड को सुरक्षित रखें

अपने बच्चे का टीकाकरण रिकॉर्ड या 'ममता कार्ड' हमेशा संभाल कर रखें। यह न केवल भविष्य में स्वास्थ्य संदर्भ के लिए जरूरी है, बल्कि स्कूल दाखिले और विदेश यात्रा के समय भी इसकी आवश्यकता हो सकती है।

कैच-अप टीकाकरण का लाभ उठाएं

यदि किसी कारणवश बच्चा कोई खुराक लेने से चूक गया है, तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। अधिकांश टीकों के लिए 'कैच-अप' कार्यक्रम होते हैं, जिससे छूटी हुई खुराक को बाद में पूरा किया जा सकता है।

झूठी खबरों बचे ओर आधिकारिक जानकारी देखे 

इंटरनेट पर उपलब्ध हर जानकारी सही नहीं होती। टीकों के दुष्प्रभावों या उनकी प्रभावशीलता के बारे में किसी भी संदेह की स्थिति में अपने डॉक्टर या प्रमाणित स्वास्थ्य पोर्टल (जैसे WHO या स्वास्थ्य मंत्रालय) की जानकारी पर ही भरोसा करें।

विश्व टीकाकरण सप्ताह 2026 की थीम, “हर पीढ़ी के लिए, टीके काम करते हैं”, हमें याद दिलाती है कि टीकाकरण एक सतत प्रक्रिया है। आज भारत सहित दक्षिण-पूर्व एशिया के देश दुनिया की आधी वैक्सीन आपूर्ति का केंद्र हैं। इस क्षमता का उपयोग हमें अपने ही बच्चों और समुदायों को सुरक्षित करने के लिए करना होगा।

एक सशक्त स्वास्थ्य प्रणाली वही है जो न केवल बीमारियों का इलाज करे, बल्कि उन्हें होने ही न दे। टीकाकरण इसी दिशा में हमारा सबसे मजबूत हथियार है। यह सुनिश्चित करना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है कि कोई भी बच्चा, चाहे वह कहीं भी रहता हो, एक सुई की चुभन से मिलने वाले जीवनदान से वंचित न रहे।

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