चेन्नई। 23 अप्रैल को मतदान हुआ। 4 मई को नतीजे आए। और तमिलनाडु की राजनीति हमेशा के लिए बदल गई। अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम यानी TVK ने 234 सीटों में से 108 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया। 1967 के बाद पहली बार कोई गैर-द्रविड़ पार्टी तमिलनाडु विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनी। DMK और AIADMK के बीच 59 साल से चला आ रहा सत्ता का खेल टूट गया। लेकिन जीत के बाद असली लड़ाई शुरू हुई सरकार बनाने की। और यह लड़ाई अभी जारी है।
राज्यपाल ने रोका 112 काफी नहीं चाहिए 118
विजय ने 6 मई को राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात की और सरकार बनाने का दावा पेश किया। लेकिन विजय के पास उस समय सिर्फ 112 विधायकों का समर्थन था। राज्यपाल ने साफ कहा 118 का बहुमत साबित करो, तभी आगे बढ़ेंगे। यह संख्या कहाँ से आई? TVK की खुद की 107 सीटें, और कांग्रेस के 5 विधायकों का समर्थन कुल 112। बहुमत के लिए 6 और चाहिए।
TVK अब VCK, CPI और CPI-M से बात कर रही है इन तीनों के पास दो-दो सीटें हैं। अगर ये तीनों साथ आ जाएं तो 6 और विधायक मिल जाएंगे और बहुमत का आँकड़ा पूरा हो जाएगा।
DMK की हार MK स्टालिन का इस्तीफा
जो सबसे ज्यादा चौंकाने वाला नतीजा था DMK के मुखिया और मुख्यमंत्री MK स्टालिन खुद अपनी सीट कोलाथुर से हार गए। यह वो सीट थी जहाँ से वे लगातार तीन बार जीते थे। 5 मई को उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।
DMK को 59 सीटें मिलीं 2021 में उसके पास 133 सीटें थीं। यानी आधे से भी कम।
Zoho के श्रीधर वेम्बू ने क्या कहा और क्यों अहम है Zoho कंपनी के सह-संस्थापक और तमिलनाडु में रहने वाले श्रीधर वेम्बू ने एक बड़ी बात कही जो राजनीतिक नहीं बल्कि व्यावहारिक थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा संख्याएं जुड़ती नहीं दिख रहीं। जो भी सरकार बनेगी वो अस्थिर होगी। उनका सुझाव था राष्ट्रपति शासन लगाओ और नोट के बदले वोट" पर सख्त रोक के साथ नए सिरे से चुनाव कराओ।
उन्होंने यह भी जोड़ा मुझे लगता है विजय इस बार और बड़े बहुमत से वापस आएंगे।
यह बात इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वेम्बू न तो किसी पार्टी के नेता हैं, न राजनेता। वे एक सफल उद्यमी हैं जो तमिलनाडु में रहते हैं और राज्य की राजनीति को बाहर से नहीं, अंदर से देखते हैं।
AIADMK का पेच — समर्थन दें या नहीं?
AIADMK ने साफ कह दिया विजय को समर्थन नहीं देंगे। AIADMK के मुखिया एडप्पाडी के पलानीस्वामी ने यह फैसला सुनाया।
लेकिन पार्टी के अंदर एक और कहानी चल रही है। सूत्रों के अनुसार AIADMK के 47 में से 30 विधायक विजय का समर्थन करना चाहते हैं। अगर पार्टी नेतृत्व ने देर की तो पार्टी में टूट हो सकती है।
यह तमिलनाडु की राजनीति का एक पुराना रिवाज है जहाँ हवा बदले, विधायक भी बदल जाते हैं।
DMK का 'छह महीने देखेंगे वाला दाँव
MK स्टालिन ने एक दिलचस्प बयान दिया। उन्होंने कहा कि DMK छह महीने तक "बिना परेशान किए देखेगी" कि TVK की सरकार कैसे चलती है।
यह बयान दो तरह से पढ़ा जा सकता है। पहला DMK सच में एक जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभाना चाहती है। दूसरा DMK इंतजार कर रही है कि TVK की नई और अनुभवहीन सरकार कोई बड़ी गलती करे, जिसके बाद वापसी का मौका मिले।
TVK की जीत के आँकड़े क्या कहते हैं?
यह वो हिस्सा है जो ज्यादातर खबरों में नहीं आया।
तमिलनाडु के इतिहास में यह सबसे ज्यादा मतदान वाला चुनाव था 85.1 प्रतिशत। (TechCrunch) इतना मतदान पहले कभी नहीं हुआ। विश्लेषकों का कहना है कि TVK ने DMK और AIADMK दोनों के वोट काटे। लेकिन दोनों से अलग-अलग तरह के वोटर खींचे।
DMK ने अपने floating voters यानी इधर-उधर जाने वाले वोटर TVK को दिए खासकर युवा, महिलाएं और पहली बार वोट देने वाले। AIADMK ने अपने core यानी पुराने और वफादार वोटर खोए। (TechCrunch)
इसका मतलब यह है कि AIADMK के लिए यह नुकसान ज्यादा खतरनाक है। DMK के वोटर वापस आ सकते हैं लेकिन AIADMK के core वोटर जो एक बार TVK की तरफ गए, वो शायद वापस न आएं।
विशेष रूप से ग्रेटर चेन्नई इलाके में TVK ने DMK और AIADMK दोनों को एक साथ नुकसान पहुँचाया यह इलाका पहले DMK का गढ़ माना जाता था।
विजय एक नेता जो दो जगह से जीता
विजय ने दो सीटों से चुनाव लड़ा पेरम्बुर और तिरुचिरापल्ली पूर्व और दोनों जीते। यह एक रणनीतिक फैसला था जो दिखाता है कि TVK किसी एक इलाके की पार्टी नहीं बल्कि पूरे राज्य में फैली हुई है।
मीडिया ने विजय की इस जीत की तुलना MG रामचंद्रन और जे जयललिता से की जो अभिनेता से मुख्यमंत्री बने थे। लेकिन विजय में एक बड़ा फर्क है वे किसी जाति या धार्मिक आधार पर नहीं, बदलाव के वादे पर जीते हैं।
तमिलनाडु का भविष्य तीन सवाल जो अभी अनुत्तरित हैं
पहला सवाल — क्या विजय 118 का आँकड़ा पूरा कर पाएंगे? VCK, CPI और CPI-M का फैसला आज या कल आएगा।
दूसरा सवाल — अगर सरकार बनी तो क्या वह टिकेगी? एक साल में ही 6 अलग-अलग पार्टियों के समर्थन से बनी सरकार को चलाना आसान नहीं होगा।
तीसरा सवाल — AIADMK का क्या होगा? अगर उसके 30 विधायक टूटकर TVK का समर्थन करते हैं तो पार्टी की पहचान ही खतरे में पड़ जाएगी। (Unite.AI)
59 साल का चक्र टूटा नया दौर शुरू
तमिलनाडु की राजनीति 1967 से एक ही ढर्रे पर चलती रही DMK जीती, AIADMK जीती, DMK जीती। इस बार वो ढर्रा टूट गया।
एक ऐसी पार्टी जो सिर्फ दो साल पहले बनी थी, उसने राज्य की सबसे पुरानी और सबसे ताकतवर दो पार्टियों को एक साथ धूल चटा दी।
अब असली परीक्षा शुरू होती है। जीतना एक बात है राज्य चलाना दूसरी। विजय ने फिल्मों में कई बार हीरो की भूमिका निभाई। अब असली जिंदगी में वो भूमिका उन्हें निभानी है बिना किसी पटकथा के।