BREAKING :
पेट्रोल पंपों पर जल्द बदलने जा रहा है तेल भरने का पूरा तरीका, सरकार के इस बड़े फैसले के पीछे क्या है असली वजह? सनरूफ देगी ठंडक या बढ़ेगी मुसीबत? टेस्ला के इस नए आविष्कार ने ऑटोमोबाइल जगत में क्यों मचाई खलबली? रिलायंस-सेबी विवाद में 19 साल बाद सबसे बड़ा मोड़, सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने सबको क्यों चौंकाया? COMEDK UGET Result 2026 Declared जारी हुआ कॉमेडके यूजीईटी का रिजल्ट, इस डायरेक्ट लिंक से तुरंत डाउनलोड करें स्कोरकार्ड Delhi Liquor Crisis शराब के शौकीनों को बड़ा झटका! हाई कोर्ट के इस एक फैसले से दिल्ली में नहीं मिलेंगी Chivas Regal और Absolut जानें पूरा मामला ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों पर अमेरिका की ऐसी कौन सी शर्त जिसने इजरायल की सुरक्षा के बीच खड़ा कर दिया नया सैन्य गतिरोध? होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर मंडराया बड़ा खतरा, जानें क्या है ट्रंप की चेतावनी! ​पेट की बीमारियों पर चिकित्सा विज्ञान का सबसे बड़ा खुलासा जानें कैसे AI और ये छोटे जीव मिलकर बदल देंगे इंसानी शरीर की पूरी सेहत! 12 राज्यों के लिए 10,021 करोड़ की भारी मंजूरी पर इस एक वजह से अटक सकता है अगली किश्तों का काम ब्रह्मांडीय उलटफेर जून 2026 में गुरु-शनि की खतरनाक युगलबंदी क्या दुनिया में आने वाला है बड़ा भौकाल

12 राज्यों में वोटर लिस्ट से 5.18 करोड़ नाम हटे, SIR का दूसरा चरण पूरा

SIR अभियान के तहत 12 राज्यों में 5.18 करोड़ नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। जानिए क्या है पूरा मामला और क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला।
12 राज्यों में वोटर लिस्ट से 5.18 करोड़ नाम हटे, SIR का दूसरा चरण पूरा

भारत में मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने के लिए चुनाव आयोग द्वारा चलाया जा रहा विशेष अभियान स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अब अपने दूसरे चरण के अंत तक पहुंच चुका है। इस चरण के पूरा होने के बाद एक बड़ा आंकड़ा सामने आया है —

 देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 5.18 करोड़ नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। यह कदम चुनाव प्रक्रिया को साफ-सुथरा और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

मतदाताओं की कुल संख्या में 10% से ज्यादा की गिरावट

चुनाव आयोग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस बड़े संशोधन के बाद देश में कुल मतदाताओं की संख्या घटकर 45.81 करोड़ रह गई है। पहले के मुकाबले यह लगभग 10.2 प्रतिशत की कमी है।

यह गिरावट केवल नाम हटाने का परिणाम नहीं है, बल्कि यह एक व्यवस्थित प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसमें फर्जी, डुप्लीकेट और अनुपयोगी रिकॉर्ड को हटाया गया है। इससे चुनावी डेटा अधिक साफ और विश्वसनीय बनता है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है।

Must Read ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों पर अमेरिका की ऐसी कौन सी शर्त जिसने इजरायल की सुरक्षा के बीच खड़ा कर दिया नया सैन्य गतिरोध? ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों पर अमेरिका की ऐसी कौन सी शर्त जिसने इजरायल की सुरक्षा के बीच खड़ा कर दिया नया सैन्य गतिरोध?

मृत मतदाताओं के नाम हटाना सबसे बड़ा कारण

इस संशोधन के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे मतदाताओं के नाम हटाए गए, जो अब जीवित नहीं हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, करीब 66.88 लाख मृत मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए।

उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 25.47 लाख मृत मतदाताओं के नाम हटाए गए

पश्चिम बंगाल में करीब 24.16 लाख नाम हटाए गए

इसके अलावा अन्य राज्यों में भी मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट नामों को हटाने का काम किया गया।

Also Read सदन में शोर नहीं तर्कों से कैसे हारी थी ब्रिटिश सत्ता? ओम बिरला ने दिल्ली विधानसभा से जारी किए ऐतिहासिक पन्ने अब AI करेगा मदद सदन में शोर नहीं तर्कों से कैसे हारी थी ब्रिटिश सत्ता? ओम बिरला ने दिल्ली विधानसभा से जारी किए ऐतिहासिक पन्ने अब AI करेगा मदद

यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मृत या गलत नामों के बने रहने से चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ सकते हैं।

इन राज्यों में पूरा हुआ दूसरा चरण

SIR का दूसरा चरण देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया गया। इनमें शामिल हैं:

उत्तर प्रदेश

पश्चिम बंगाल

तमिलनाडु

राजस्थान

छत्तीसगढ़

केरल

गुजरात

मध्य प्रदेश

गोवा

पुडुचेरी

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह

लक्षद्वीप

इन सभी जगहों पर मतदाता सूची का गहन सत्यापन किया गया। उत्तर प्रदेश की अंतिम वोटर लिस्ट जारी होने के साथ ही इस चरण को आधिकारिक रूप से पूरा घोषित कर दिया गया।

 कैसे होती है मतदाता सूची की जांच?

मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया एक तकनीकी और जमीनी दोनों स्तरों पर होती है। इसमें कई तरीके अपनाए जाते हैं:

घर-घर जाकर सत्यापन

सरकारी रिकॉर्ड (जैसे मृत्यु प्रमाण पत्र) से मिलान

डुप्लीकेट नामों की पहचान

स्थान बदलने वाले मतदाताओं को हटाना

इस पूरी प्रक्रिया में बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) की अहम भूमिका होती है, जो सीधे लोगों से संपर्क कर जानकारी इकट्ठा करते हैं।

 तीसरे चरण में 40 करोड़ मतदाताओं की होगी समीक्षा

अब चुनाव आयोग इस अभियान के तीसरे और अंतिम चरण की तैयारी कर रहा है। इस चरण में देश के बाकी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के करीब 40 करोड़ मतदाताओं की समीक्षा की जाएगी।

इनमें शामिल हैं:

आंध्र प्रदेश

दिल्ली

महाराष्ट्र

कर्नाटक

पंजाब

हरियाणा

उत्तराखंड

झारखंड

ओडिशा

तेलंगाना

हिमाचल प्रदेश

जम्मू-कश्मीर

लद्दाख

पूर्वोत्तर के कई राज्य

यह चरण इस पूरे अभियान का सबसे बड़ा और अहम हिस्सा होगा।

चुनाव के बाद शुरू होगा अंतिम चरण

तीसरा चरण उन राज्यों में विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद शुरू किया जाएगा, जहां फिलहाल चुनाव प्रक्रिया चल रही है।

असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को मतदान हो चुका है

पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को वोटिंग होगी

तमिलनाडु में भी जल्द चुनाव होने वाले हैं

सभी राज्यों के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे

इन चुनावों के बाद ही अंतिम चरण को लागू किया जाएगा, ताकि किसी भी तरह का चुनावी प्रभाव इस प्रक्रिया पर न पड़े।

क्यों जरूरी है SIR अभियान?

मतदाता सूची का समय-समय पर अपडेट होना लोकतंत्र के लिए बेहद जरूरी है। इसके कई फायदे हैं:

फर्जी और डुप्लीकेट वोटिंग पर रोक लगती है

चुनाव परिणामों की विश्वसनीयता बढ़ती है

सही मतदाताओं को ही मतदान का अधिकार मिलता है

नई पीढ़ी के मतदाताओं को जोड़ा जा सकता है

यदि मतदाता सूची अपडेट नहीं होती, तो चुनाव प्रणाली में गड़बड़ी और विवाद की संभावना बढ़ जाती है।

 पारदर्शिता और भरोसे की दिशा में बड़ा कदम

चुनाव आयोग का यह अभियान न केवल तकनीकी सुधार है, बल्कि यह लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। करोड़ों नाम हटाए जाने के बावजूद इसका उद्देश्य किसी को बाहर करना नहीं, बल्कि सही और योग्य मतदाताओं की सूची तैयार करना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के नियमित संशोधन से भविष्य में चुनाव और अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी बनेंगे।

SIR के दूसरे चरण के पूरा होने के बाद यह साफ हो गया है कि चुनाव आयोग मतदाता सूची को अपडेट और सटीक बनाने के लिए पूरी गंभीरता से काम कर रहा है। 5.18 करोड़ नामों को हटाना एक बड़ा और अहम कदम है, जो चुनावी व्यवस्था को और मजबूत बनाएगा।

अब सभी की नजर तीसरे चरण पर है, जिसमें देश के बाकी हिस्सों के मतदाताओं की समीक्षा की जाएगी। यह पूरी प्रक्रिया अंततः एक साफ, पारदर्शी और भरोसेमंद चुनाव प्रणाली की ओर ले जाएगी।

 

 

Disclaimer 
इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न समाचार एजेंसियों और सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी प्रदान करना है। किसी भी त्रुटि या बदलाव के लिए आधिकारिक स्रोतों की पुष्टि आवश्यक है

Admin Desk

Admin Desk

I am senior editor of this News Portal. Me and my team verify all news with trusted sources and publish here.

Home Shorts

Categories