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एग्जिट पोल में हार हाई कोर्ट से झटका चुनाव आयोग से टकराव TMC के लिए 4 मई से पहले 3 बड़े संकट

एग्जिट पोल में हार हाई कोर्ट से झटका चुनाव आयोग से टकराव TMC के लिए 4 मई से पहले 3 बड़े संकट

 5 में से 4 एग्जिट पोल ने बीजेपी को विजेता बताया, कलकत्ता हाई कोर्ट ने टीएमसी की याचिका खारिज की, और चुनाव आयोग से विवाद अभी भी जारी — ममता की कुर्सी पर सबसे बड़ा खतरा 4 मई 2026 — यह वो तारीख है जो तय करेगी कि पश्चिम बंगाल में अगले पाँच साल किसका राज होगा। लेकिन उस काउंटिंग से पहले ही ममता बनर्जी की टीएमसी को एक के बाद एक तीन बड़े झटके लग चुके हैं। एग्जिट पोल में हार का अनुमान, कलकत्ता हाई कोर्ट से करारा जवाब, और चुनाव आयोग के साथ चल रहा विवाद तीनों मिलकर टीएमसी के लिए एक मुश्किल तस्वीर बना रहे हैं।

पश्चिम बंगाल की 294 सीटों पर दो चरणों में मतदान हुआ  23 अप्रैल और 29 अप्रैल 2026 को। पहले चरण में 152 और दूसरे में 142 सीटों पर वोटिंग हुई। पहले चरण में मतदाता मतदान 93.19% रहा जो अपने आप में रिकॉर्ड है। पूरे चुनाव में केंद्रीय सुरक्षा बलों की भारी तैनाती के बीच मतदान काफी हद तक शांतिपूर्ण रहा।

मुख्य मुकाबला है टीएमसी और बीजेपी के बीच। टीएमसी लगातार चौथी बार सत्ता में वापसी चाहती है बीजेपी इतिहास रचना चाहती है। और इस चुनाव में एक और कारक था  आरजी कर मेडिकल कॉलेज दुष्कर्म-हत्या मामला  जिसने पूरे बंगाल में टीएमसी के खिलाफ गुस्से को हवा दी।

पहला झटका एग्जिट पोल में हार का अनुमान

29 अप्रैल को जैसे ही दूसरे चरण की वोटिंग खत्म हुई, शाम 6:30 बजे के बाद एग्जिट पोल आने शुरू हुए  और टीएमसी के लिए खबर अच्छी नहीं थी। मैट्राइज एग्जिट पोल के मुताबिक बीजेपी को 146 से 161 सीटें मिल सकती हैं। टीएमसी 125 से 140 सीटों पर सिमट सकती है। अन्य दल 6 से 10 सीटें पा सकते हैं। वोट शेयर में बीजेपी 42.5% और टीएमसी 40.8% पर है यानी बीजेपी न सिर्फ सीटों में बल्कि वोट में भी आगे।

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5 में से 4 एग्जिट पोल ने बीजेपी को बढ़त दी। सिर्फ एक ने टीएमसी की वापसी का अनुमान लगाया। पोल ऑफ पोल्स का औसत देखें तो बीजेपी 148 और टीएमसी 135 के आसपास है। बहुमत के लिए 148 सीटें चाहिए यानी बीजेपी बहुत करीब है। बंगाल एग्जिट पोल का इतिहास बेहद अविश्वसनीय रहा है। 2021 में भी ज़्यादातर एग्जिट पोल ने टीएमसी को कम सीटें दी थीं और ममता 213 सीटें जीत गई थीं। इसीलिए बीजेपी जश्न मनाने से बच रही है और टीएमसी हार मानने से।

दूसरा झटका  कलकत्ता हाई कोर्ट से करारा जवाब

एग्जिट पोल के अगले ही दिन टीएमसी को कलकत्ता हाई कोर्ट में एक बड़ा झटका लगा। टीएमसी ने अदालत में याचिका दायर की थी कि 4 मई की मतगणना में केंद्रीय सरकार और सार्वजनिक उपक्रम के कर्मचारियों की जगह राज्य सरकार के कर्मचारियों को लगाया जाए। तर्क यह था कि केंद्रीय कर्मचारी बीजेपी-नियंत्रित केंद्र सरकार के इशारे पर काम कर सकते हैं।

न्यायमूर्ति कृष्णा राव ने याचिका सुनी  और खारिज कर दी। अदालत ने साफ कहा चुनाव आयोग का यह अधिकार है कि वह केंद्रीय या राज्य  किसी से भी काउंटिंग सुपरवाइजर और सहायक नियुक्त करे। इसमें कोई अवैधता नहीं है।

टीएमसी के आरोप पर अदालत ने और कड़ा रुख अपनाया। न्यायाधीश ने कहा  यह मानना असंभव है कि टीएमसी का आरोप सही है। अदालत ने यह भी कहा कि काउंटिंग हॉल में सिर्फ सुपरवाइजर और सहायक ही नहीं होते माइक्रो ऑब्जर्वर, उम्मीदवारों के काउंटिंग एजेंट और अन्य कर्मचारी भी मौजूद रहते हैं। इतनी बहु-स्तरीय व्यवस्था में गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं।

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चुनाव आयोग के वकील ने यह भी कहा कि टीएमसी ने यह याचिका मतगणना रोकने के इरादे से दायर की थी  न कि किसी वास्तविक शिकायत के आधार पर।

तीसरा झटका चुनाव आयोग के साथ चल रहा टकराव

टीएमसी और चुनाव आयोग के बीच पिछले कुछ दिनों से कई मोर्चों पर विवाद चल रहा है। दक्षिण 24 परगना की चार विधानसभा सीटों मगराहाट पूर्व, मगराहाट पश्चिम, डायमंड हार्बर और फलता  पर टीएमसी ने पुलिस पर्यवेक्षक को हटाने की माँग की। आरोप था कि पर्यवेक्षक ने बीजेपी उम्मीदवार से निजी मुलाकात की। चुनाव आयोग ने इसे आधिकारिक बैठक बताया और पर्यवेक्षक को नहीं हटाया। इसके अलावा टीएमसी ने स्ट्रॉन्गरूम सुरक्षा पर भी सवाल उठाए। ममता बनर्जी ने खुद कहा कि ईवीएम की सुरक्षा को लेकर उन्हें शक है। चुनाव आयोग ने इन सभी आरोपों को निराधार बताया।

ममता का पलटवार एग्जिट पोल नकली हैं।

तीनों झटकों के बावजूद ममता बनर्जी ने हार नहीं मानी। उन्होंने एग्जिट पोल को बीजेपी-समर्थित बनावटी सर्वे" करार दिया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा शांत रहो, 4 मई का इंतज़ार करो। जनता का फैसला ईवीएम में बंद है। यह वही ममता हैं जो 2021 में भी एग्जिट पोल को गलत साबित कर चुकी हैं। इसीलिए बीजेपी के नेता भी अभी जश्न मनाने से बच रहे हैं।

 आरजी कर फैक्टर

 आरजी कर मेडिकल कॉलेज दुष्कर्म और हत्या मामला। अगस्त 2024 में एक डॉक्टर के साथ हुई इस घटना ने पूरे बंगाल में टीएमसी के खिलाफ गुस्से की लहर पैदा की थी। बीजेपी ने इस मुद्दे को पूरे चुनाव में ज़िंदा रखा। बीजेपी उम्मीदवार रत्ना देबनाथ जो उस पीड़िता की माँ हैं  ने खुद वोट डाला। अगर यह सत्ता-विरोधी लहर जमीन पर मजबूत है तो एग्जिट पोल से भी बुरे नतीजे आ सकते हैं टीएमसी के लिए।

4 मई को क्या होगा 

 बीजेपी जीती अगर एग्जिट पोल सही निकले तो बीजेपी 148+ सीटें जीतकर सरकार बनाएगी। ममता बनर्जी 14 साल बाद विपक्ष में होंगी  यह बंगाल की राजनीति में एक बड़ा भूकंप होगा।  अगर 2021 जैसा हुआ और एग्जिट पोल गलत निकले तो ममता चौथी बार मुख्यमंत्री बनेंगी। बीजेपी की बड़ी हार होगी और शुभेंदु अधिकारी के भविष्य पर सवाल उठेंगे।  अगर किसी को 148 नहीं मिलीं तो बंगाल में राजनीतिक नाटक शुरू होगा। छोटे दल किंगमेकर बन जाएंगे।

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