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आयुष्मान मंदिर और 15% का तगड़ा झटका! शुभेंदु अधिकारी के इस एक फैसले से हिल गया बंगाल का पूरा प्राइवेट मेडिकल सिस्टम

आयुष्मान मंदिर और 15% का तगड़ा झटका! शुभेंदु अधिकारी के इस एक फैसले से हिल गया बंगाल का पूरा प्राइवेट मेडिकल सिस्टम

 

कोलकाता/सिल्लागुड़ी: पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को आधुनिक और सर्वसुलभ बनाने के लिए व्यापक नीतिगत और ढांचागत सुधारों की आधिकारिक घोषणा की है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा हाल ही में सरकारी एसएसकेएम (SSKM) अस्पताल में 100 बेड के नए वार्ड के उद्घाटन के साथ-साथ राज्य में आयुष्मान भारत योजना को लागू करने की प्रतिबद्धता जताई गई है। इस नई नीति के तहत राज्य के 1 करोड़ 36 लाख परिवारों को केंद्रीय स्वास्थ्य बीमा के दायरे में लाया जाएगा और सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों को 'आयुष्मान मंदिर' के रूप में पुनर्गठित किया जाएगा।

इस बड़े प्रशासनिक बदलाव को समझने के लिए पश्चिम बंगाल के मौजूदा स्वास्थ्य ढांचे (पुराने डेटा) और उत्तर बंगाल तथा दक्षिण बंगाल के बीच चिकित्सा संसाधनों के वर्तमान वितरण का विश्लेषण करना आवश्यक है। वर्तमान में राज्य के भीतर चिकित्सा सुविधाओं का भार कुछ विशिष्ट संस्थानों पर अत्यधिक है, जिसे संतुलित करने के लिए ये नए कदम उठाए जा रहे हैं।


पश्चिम बंगाल का मौजूदा स्वास्थ्य ढांचा: अभी कहाँ क्या है? (Existing Healthcare Data)

राज्य में वर्तमान में सुपर-स्पेशियलिटी और प्राथमिक चिकित्सा का एक विस्तृत नेटवर्क मौजूद है, जिसका मुख्य विवरण निम्नलिखित है:

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1. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS कल्याणी)

वर्तमान में पश्चिम बंगाल में एकमात्र क्रियाशील एम्स संस्थान 'एम्स कल्याणी' (AIIMS Kalyani) है, जो नादिया (Nadia) जिले में स्थित है। यह केंद्र सरकार के 'प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना' (PMSSY) के तहत स्थापित किया गया था। यह संस्थान वर्तमान में दक्षिण और मध्य बंगाल के जिलों के लिए एक प्रमुख मेडिकल हब के रूप में कार्य कर रहा है, जहां प्रतिदिन हजारों की ओपीडी (OPD) संचालित होती है। परंतु, उत्तर बंगाल के जिलों से इसकी दूरी लगभग 400 से 500 किलोमीटर होने के कारण वहां के नागरिकों को इसका सीधा लाभ नहीं मिल पाता है।

2. उत्तर बंगाल की मौजूदा स्थिति (North Bengal Healthcare Status)

उत्तर बंगाल (जिसमें दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी, कूचबिहार, अलीपुरद्वार, कालिम्पोंग, उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर और मालदा जिले शामिल हैं) वर्तमान में मुख्य रूप से 'उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज और अस्पताल' (NBMCH) पर निर्भर है, जो सिलीगुड़ी (सुश्रुतनगर) में स्थित है। इसके अतिरिक्त जिलों में जिला अस्पताल (District Hospitals) और सब-डिवीजनल अस्पताल कार्यरत हैं। हालांकि, इन मौजूदा संस्थानों पर मरीजों का अत्यधिक दबाव है, जिसके कारण अक्सर गंभीर मामलों को कोलकाता रेफर करना पड़ता है।

3. कोलकाता का मुख्य चिकित्सा नेटवर्क

दक्षिण बंगाल और राज्य की राजधानी में चिकित्सा का मुख्य केंद्र IPGMER और SSKM अस्पताल, कलकत्ता मेडिकल कॉलेज, आरजी कर मेडिकल कॉलेज और एनआरएस मेडिकल कॉलेज हैं। एसएसकेएम अस्पताल राज्य का शीर्ष रेफरल अस्पताल है, जहां अब मरीजों के भार और रेफरल प्रबंधन को ठीक करने के लिए 100 नए बेड चालू किए गए हैं।


डेटा तालिका मौजूदा बनाम प्रस्तावित स्वास्थ्य अवसंरचना (Comparative Data Table)

पश्चिम बंगाल की वर्तमान चिकित्सा व्यवस्था और आगामी विकास योजनाओं का तुलनात्मक विवरण इस प्रकार है:

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चिकित्सा श्रेणी / संस्थान मौजूदा स्थिति (Current Status) नया नीतिगत बदलाव / प्रस्तावित योजना (2026)
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) केवल 1 क्रियाशील संस्थान (AIIMS कल्याणी, नादिया जिला, दक्षिण बंगाल) उत्तर बंगाल के सिलीगुड़ी या जलपाईगुड़ी क्षेत्र में दूसरे एम्स-जैसे संस्थान के लिए भूमि की पहचान जारी।
स्वास्थ्य बीमा कवरेज राज्य स्तर पर सीमित विनियामक ढांचा था। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) का पूर्ण कार्यान्वयन; 1.36 करोड़ परिवारों को आयुष्मान भारत कवरेज।
SSKM अस्पताल क्षमता गंभीर रेफरल मामलों के कारण बेड की भारी कमी। 100 बेड वाले नए वार्ड का वर्चुअल उद्घाटन; रेफरल मामलों की निगरानी के लिए विशेष टीम का गठन।
निजी अस्पताल विनियम (Private Sector) गरीब मरीजों के लिए बेड का कोई निश्चित कड़ा कोटा प्रभावी नहीं था। सरकार से 1 रुपये की रियायती दर पर जमीन लेने वाले निजी अस्पतालों में 15% बेड गरीबों के लिए आरक्षित।
प्राथमिक एवं ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र पारंपरिक ब्लॉक और ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHCs/CHCs)। पूरे राज्य में चिकित्सा केंद्रों की रीब्रांडिंग, नया आधिकारिक नाम 'आयुष्मान मंदिर' होगा।

उत्तर बंगाल में नए एम्स (AIIMS) की आवश्यकता और संभावित स्थान

भौगोलिक रूप से उत्तर बंगाल का क्षेत्र सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के माध्यम से पूर्वोत्तर राज्यों, बिहार और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं (नेपाल, भूटान, बांग्लादेश) से जुड़ा हुआ है। इसी रणनीतिक महत्व को देखते हुए राज्य सरकार यहां एम्स जैसी संस्था के लिए जमीन तलाश रही है।

  • संभावित स्थान (Potential Locations): प्रशासनिक स्तर पर सिलीगुड़ी के मैदानी इलाकों (बागडोगरा या एनजीपी के पास राष्ट्रीय राजमार्ग से सटे क्षेत्र), जलपाईगुड़ी के लैंड बैंक और उत्तर दिनाजपुर के इस्लामपुर बेल्ट में उपयुक्त सरकारी और विवाद-मुक्त भूमि की मैपिंग की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य परिवहन और रेलवे कनेक्टिविटी को बेहतर रखना है।
  • जनता को लाभ: इस नए संस्थान के बनने से दार्जिलिंग, सिक्किम और डुआर्स के पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को सुपर-स्पेशियलिटी उपचार (जैसे कार्डियोलॉजी, ऑन्कोलॉजी और न्यूरोलॉजी) के लिए कोलकाता या दिल्ली जाने की आवश्यकता नहीं होगी।

टीकाकरण और जनशक्ति (Human Resources) में सुधार

ढांचागत सुधारों के साथ-साथ, स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं की संख्या बढ़ाने पर भी काम शुरू किया गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत राज्य भर के अस्पतालों में डॉक्टरों, विशेषज्ञ नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ, लैब तकनीशियनों और गैर-तकनीकी कर्मियों की बड़े पैमाने पर नई भर्तियां की जाएंगी।

इसके अतिरिक्त, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से प्राप्त 7,72,750 वैक्सीन खुराकों को राज्य के 235 ग्रामीण, ब्लॉक और जिला अस्पतालों के माध्यम से रिकॉर्ड तीन सप्ताह के भीतर सफलतापूर्वक नागरिकों तक पहुंचाया गया है, जो राज्य की त्वरित वितरण क्षमता को दर्शाता है।

Input:ddnews

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