भारत में लिवर की बीमारियाँ अब केवल उम्रदराज लोगों या शराब पीने वालों तक सीमित नहीं रही हैं। हाल ही में 'केयर हेल्थ इंश्योरेंस' (Care Health Insurance) द्वारा जारी एक चौंकाने वाली रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि पिछले तीन वर्षों में लिवर से जुड़े इंश्योरेंस क्लेम में दोगुनी बढ़ोतरी हुई है।
19 अप्रैल को मनाए गए 'विश्व लिवर दिवस' के अवसर पर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि भारत एक ऐसी स्वास्थ्य स्थिति की ओर बढ़ रहा है जिसे 'साइलेंट एपिडेमिक' (शांत महामारी) कहा जा रहा है। यहाँ लिवर की बीमारियों से जुड़े बढ़ते खर्चों, नए खतरों और बचाव के तरीकों पर एक विस्तृत रिपोर्ट दी गई है।
3 साल में दोगुना हुआ लिवर के इलाज का खर्च
केयर हेल्थ इंश्योरेंस के आंकड़ों के अनुसार, लिवर की बीमारियों के इलाज की लागत पिछले तीन सालों में लगभग 100% बढ़ गई है।
महंगा हुआ इलाज: रिपोर्ट बताती है कि अब लिवर के एक गंभीर केस के इलाज के लिए कम से कम 15 लाख रुपये का हेल्थ इंश्योरेंस कवर होना अनिवार्य हो गया है।
आर्थिक बोझ: इलाज की बढ़ती कीमतों के कारण मध्यमवर्गीय परिवारों पर भारी आर्थिक दबाव पड़ रहा है। लिवर ट्रांसप्लांट या क्रोनिक लिवर केयर अब सामान्य बजट से बाहर होती जा रही है।
युवाओं और महिलाओं पर बढ़ता खतरा
रिपोर्ट का सबसे डरावना पहलू यह है कि अब लिवर की बीमारियाँ युवाओं को अपना शिकार बना रही हैं।
युवाओं में बढ़ोतरी: हर साल युवाओं (Young Cohorts) के मामलों में 5% से 10% की वृद्धि देखी जा रही है। इसका मुख्य कारण बिगड़ती जीवनशैली, जंक फूड और शारीरिक निष्क्रियता है।
महिलाओं में बढ़ते केस: महिला पॉलिसीधारकों के क्लेम डेटा में भी सालाना 10% की बढ़ोतरी देखी गई है।
छोटे शहरों का बुरा हाल: अब यह बीमारी महानगरों तक सीमित नहीं है। टियर-2 और टियर-3 शहरों (छोटे शहरों) से आने वाले क्लेम में हर साल 10% से 15% का उछाल आ रहा है।
नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर' (NAFLD) एक साइलेंट किलर
स्वास्थ्य मंत्रालय (Ministry of Health and Family Welfare) के अनुसार, भारत की 9% से 32% आबादी फैटी लिवर की समस्या से जूझ रही है। यानी हर तीन में से एक भारतीय का लिवर सामान्य से ज्यादा चर्बी जमा कर रहा है।
बिना लक्षण की बीमारी: इसे 'साइलेंट एपिडेमिक' इसलिए कहा जाता है क्योंकि शुरुआती चरणों में इसके कोई लक्षण नहीं दिखते।
मृत्यु दर: भारत में लिवर से जुड़ी स्थितियां कुल मृत्यु दर के 66% से अधिक के लिए जिम्मेदार हैं।
लिवर खराब होने के मुख्य कारण
आधुनिक जीवनशैली में कई ऐसी आदतें हैं जो हमारे लिवर को धीरे-धीरे खत्म कर रही हैं:
शराब का अत्यधिक सेवन: लिवर सिरोसिस का यह सबसे बड़ा कारण है।
जंक फूड और मोटापा: अत्यधिक चीनी और फैट वाला खाना लिवर में सूजन पैदा करता है।
मधुमेह (Diabetes): टाइप-2 डायबिटीज वाले लोगों में फैटी लिवर का खतरा बहुत ज्यादा होता है।
दवाओं का दुरुपयोग: बिना डॉक्टरी सलाह के पेनकिलर्स या सप्लीमेंट्स लेना लिवर को नुकसान पहुँचाता है।
बचाव के तरीके लिवर को कैसे रखें स्वस्थ ?
विशेषज्ञों के अनुसार, लिवर शरीर का एकमात्र ऐसा अंग है जो खुद को ठीक (Regenerate) कर सकता है, बशर्ते हम सही समय पर ध्यान दें:
हेल्दी डाइट: ताजे फल, सब्जियां और फाइबर युक्त भोजन लें। चीनी और नमक का सेवन कम करें।
नियमित व्यायाम: दिन में कम से कम 30 मिनट पैदल चलना या एक्सरसाइज करना फैटी लिवर के खतरे को 40% तक कम कर सकता है।
हेल्थ चेकअप: 30 साल की उम्र के बाद साल में एक बार 'लिवर फंक्शन टेस्ट' (LFT) जरूर करवाएं।
इंश्योरेंस अपडेट: जैसा कि एक्सपर्ट्स ने कहा है, बढ़ती बीमारियों को देखते हुए अपने हेल्थ इंश्योरेंस के 'सम इंश्योर्ड' (Sum Insured) की समीक्षा जरूर करें।