विश्व मलेरिया दिवस 2026 के अवसर पर दुनिया भर में इस जानलेवा बीमारी को समाप्त करने के प्रयासों पर चर्चा तेज हो गई है। इस साल की थीम 'ड्रिवन टू एंड मलेरिया' (Driven to End Malaria) स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करने और समुदायों को जागरूक करने पर केंद्रित है। जहां कई देश मलेरिया मुक्त होने का गौरव हासिल कर रहे हैं, वहीं भारत के लिए अगले चार साल बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं।
मलेरिया क्या है और यह कैसे फैलता है ?
मलेरिया एक गंभीर और कभी-कभी जानलेवा साबित होने वाली बीमारी है, जो 'प्लाज्मोडियम' नामक परजीवी (Parasite) के कारण होती है। यह मुख्य रूप से संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से इंसानों में फैलता है। जब यह मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है, तो परजीवी रक्त के माध्यम से लीवर तक पहुंच जाते हैं और वहां अपनी संख्या बढ़ाते हैं।

यह बीमारी सीधे एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलती, लेकिन रक्त आधान (Blood Transfusion) या संक्रमित सुई के जरिए इसका प्रसार संभव है। वर्तमान में मलेरिया के वैश्विक मामलों में कमी आई है, लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण मच्छरों के बदलते व्यवहार ने नई चुनौतियां पेश की हैं।
मलेरिया के शुरुआती लक्षण और चेतावनी संकेत
मलेरिया के लक्षण आमतौर पर मच्छर के काटने के 10 से 15 दिनों के बाद दिखाई देते हैं। इसकी पहचान करना कभी-कभी मुश्किल होता है क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू या वायरल बुखार जैसे लग सकते हैं।
मुख्य लक्षणों में तेज बुखार, कंपकंपी के साथ ठंड लगना, अत्यधिक पसीना आना और सिरदर्द शामिल हैं। इसके अलावा मरीज को उल्टी, मांसपेशियों में दर्द और थकान महसूस हो सकती है। यदि बुखार हर दूसरे या तीसरे दिन उतरकर फिर से चढ़ रहा है, तो यह मलेरिया का एक स्पष्ट संकेत हो सकता है जिसे नजरअंदाज करना घातक हो सकता है।
बीमारी के मुख्य कारण और जोखिम वाले समूह
मलेरिया के फैलने का सबसे बड़ा कारण गंदगी और रुका हुआ पानी है, जहां मच्छर अपने अंडे देते हैं। जल निकासी की खराब व्यवस्था और निर्माण स्थलों पर जमा पानी मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करते हैं।
पांच साल से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती महिलाएं और एचआईवी/एड्स से पीड़ित लोग इस बीमारी के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं। इसके अलावा, वे लोग जो ऐसे क्षेत्रों से यात्रा कर रहे हैं जहां मलेरिया का प्रकोप अधिक है, उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
वैश्विक सफलता मलेरिया मुक्त देशों की बढ़ती सूची
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने हाल के वर्षों में कई देशों को मलेरिया मुक्त प्रमाणित किया है। 2024 से 2026 के बीच मिस्र, काबो वर्दे, तिमोर-लेस्ते और सूरीनाम ने इस सूची में अपनी जगह बनाई है। इन देशों की सफलता का राज मजबूत निगरानी तंत्र और जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार रहा है।
मिस्र जैसे देशों ने जल प्रबंधन में सुधार किया, जबकि सूरीनाम ने दूरदराज के इलाकों में मोबाइल हेल्थ यूनिट्स के जरिए हर मरीज तक पहुंच बनाई। WHO किसी देश को यह प्रमाण पत्र तभी देता है जब वहां लगातार तीन साल तक स्थानीय संक्रमण का कोई मामला न मिले।
भारत का रोडमैप 2027 और 2030 का लक्ष्य
भारत सरकार ने 'नेशनल स्ट्रैटेजिक प्लान फॉर मलेरिया एलिमिनेशन' के तहत 2027 तक स्थानीय मामलों को शून्य करने का लक्ष्य रखा है। सरकार का अंतिम उद्देश्य 2030 तक पूरे देश से मलेरिया को पूरी तरह खत्म करना है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने मामलों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की है, और कई जिलों में अब एक भी मामला सामने नहीं आ रहा है।
हालांकि, दक्षिण-पूर्व एशिया के कुल मलेरिया बोझ का लगभग 73% अभी भी भारत में है। ओडिशा, छत्तीसगढ़ और झारखंड जैसे राज्यों के आदिवासी और वन क्षेत्रों में इस लक्ष्य को हासिल करना एक बड़ी चुनौती है। इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य कर्मियों की पहुंच और जांच किट की उपलब्धता पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
बचाव के उपाय और व्यावहारिक सुझाव
मलेरिया से बचने का सबसे प्रभावी तरीका मच्छरों के साथ संपर्क को कम करना है। घर की खिड़कियों और दरवाजों पर जाली लगवाना एक प्राथमिक सुरक्षा कवच है। सोते समय हमेशा कीटनाशक उपचारित मच्छरदानी (LLINs) का प्रयोग करें, क्योंकि मलेरिया के मच्छर मुख्य रूप से रात में काटते हैं।
पाठकों के लिए कुछ व्यावहारिक सुझाव:
पानी का प्रबंधन: गमलों, पुराने टायरों और कूलर में पानी जमा न होने दें। यदि पानी हटाना संभव न हो, तो उसमें थोड़ा मिट्टी का तेल डाल दें।
कपड़ों का चुनाव: शाम के समय बाहर निकलते वक्त पूरी बाजू के कपड़े पहनें और शरीर के खुले हिस्सों पर मॉस्किटो रिपेलेंट क्रीम का इस्तेमाल करें।
घर के अंदर छिड़काव: स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए जाने वाले 'इनडोर रेजिडेंशियल स्प्रे' (IRS) में सहयोग करें, यह मच्छरों की संख्या कम करने में कारगर है।
इलाज और डॉक्टर से सलाह कब लें ?
मलेरिया का इलाज संभव है, बशर्ते इसे समय पर पहचाना जाए। आज के समय में 'आर्टेमिसिनिन-आधारित संयोजन थेरेपी' (ACT) मलेरिया के इलाज में सबसे प्रभावी मानी जाती है। यदि आपको या परिवार में किसी को ठंड के साथ तेज बुखार महसूस हो, तो बिना देरी किए 24 घंटे के भीतर रक्त की जांच (RDT या स्लाइड टेस्ट) करानी चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं का कोर्स बीच में कभी न छोड़ें। दवा बीच में छोड़ने से शरीर में परजीवी पूरी तरह खत्म नहीं होते और दोबारा संक्रमण (Relapse) का खतरा बढ़ जाता है, जो पहले से अधिक गंभीर हो सकता है।
भविष्य की तकनीक वैक्सीन और नई उम्मीद
चिकित्सा जगत में मलेरिया की वैक्सीन (जैसे R21/Matrix-M) एक बड़ी क्रांति लेकर आई है। कई अफ्रीकी देशों में इसके सफल प्रयोग के बाद अब इसे अन्य प्रभावित क्षेत्रों में भी लागू किया जा रहा है। इसके अलावा, जेनेटिकली मॉडिफाइड मच्छरों पर भी शोध चल रहा है जो मलेरिया के परजीवी को आगे नहीं फैला पाएंगे।
भारत में भी 'मलेरिया एलिमिनेशन रिसर्च एलायंस' (MERA-India) जैसी पहल तकनीकी नवाचार और डेटा विश्लेषण के जरिए इस लड़ाई को मजबूत कर रही है। आम लोगों की जागरूकता और सरकारी प्रयासों का तालमेल ही इस बीमारी को इतिहास बनाने में सफल होगा।