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तमिलनाडु में राजनीतिक संकट गहराया क्या सचमुच अपने 107 विधायकों से इस्तीफा दिला सकती है विजय की TVK ?

तमिलनाडु में राजनीतिक संकट गहराया क्या सचमुच अपने 107 विधायकों से इस्तीफा दिला सकती है विजय की TVK ?

चेन्नई तमिलनाडु की राजनीति 2026 विधानसभा चुनाव के बाद ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है जहां हर घंटे नए समीकरण बनते और बिगड़ते दिखाई दे रहे हैं। अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन बहुमत से दूर रहने के कारण सरकार गठन का रास्ता अब भी साफ नहीं हो पाया है।

इसी बीच एक नई राजनीतिक हलचल ने पूरे राज्य का ध्यान खींच लिया है। सूत्रों के मुताबिक, अगर DMK या AIADMK को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया गया, तो TVK अपने सभी 107 विधायकों से सामूहिक इस्तीफा दिलाने पर विचार कर सकती है।

हालांकि पार्टी की ओर से आधिकारिक तौर पर ऐसा कोई बयान नहीं आया है, लेकिन यह संकेत बताता है कि विजय खेमे में राजनीतिक बेचैनी तेजी से बढ़ रही है।

सबसे बड़ी पार्टी, लेकिन सत्ता से दूर

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में TVK ने 108 सीटें जीतकर राज्य की राजनीति में ऐतिहासिक एंट्री की।करीब पांच दशक से DMK और AIADMK के बीच घूम रही तमिलनाडु की राजनीति में यह पहली बार था जब कोई नया दल इतनी बड़ी ताकत के साथ उभरा। लेकिन 234 सदस्यीय विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 118 सीटों की जरूरत है। विजय की पार्टी इस आंकड़े से 10 सीट पीछे रह गई। स्थिति और जटिल तब हो गई जब विजय को संवैधानिक नियमों के तहत अपनी दो सीटों में से एक सीट छोड़नी पड़ी। इसके बाद TVK की प्रभावी संख्या 107 रह गई।

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राज्यपाल और विजय के बीच क्या हुआ ?

चुनाव नतीजों के बाद विजय ने तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया। सूत्रों के अनुसार विजय ने राज्यपाल से लगभग 40 मिनट तक अकेले में बातचीत की। उनके साथ TVK के वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। लेकिन राजभवन की ओर से साफ कर दिया गया कि TVK अभी तक 118 विधायकों के समर्थन का स्पष्ट प्रमाण नहीं दे पाई है। यही वह बिंदु है जहां से राजनीतिक विवाद और संवैधानिक बहस दोनों तेज हो गईं।

क्या राज्यपाल ने सही फैसला लिया ?

वामपंथी दलों और कई संवैधानिक विशेषज्ञों का कहना है कि राज्यपाल को सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते TVK को पहले सरकार बनाने का अवसर देना चाहिए था। CPI और CPI(M) जैसे दलों ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक SR Bommai फैसले का हवाला देते हुए कहा कि बहुमत का परीक्षण विधानसभा के फ्लोर टेस्ट में होना चाहिए, न कि राज्यपाल के व्यक्तिगत आकलन के आधार पर।

वाम दलों का आरोप है कि अगर DMK और AIADMK जैसे दल मिलकर सरकार बनाने की कोशिश करते हैं, तो यह जनादेश की “राजनीतिक हेरफेर” होगी।

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DMK और AIADMK की नजदीकी क्यों चर्चा में ?

तमिलनाडु की राजनीति में सबसे ज्यादा हैरानी इस बात ने पैदा की कि कट्टर प्रतिद्वंद्वी माने जाने वाले DMK और AIADMK के बीच बैकचैनल बातचीत की खबरें सामने आईं। राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि दोनों दल TVK को सत्ता से दूर रखने के लिए संभावित सहयोग के विकल्प तलाश रहे हैं। हालांकि DMK ने सार्वजनिक रूप से ऐसे किसी गठबंधन की पुष्टि नहीं की है, लेकिन AIADMK विधायकों को पुडुचेरी के रिसॉर्ट में भेजे जाने की खबरों ने अटकलों को और बढ़ा दिया है। TVK नेताओं का मानना है कि यह पूरा प्रयास विजय को सत्ता तक पहुंचने से रोकने के लिए किया जा रहा है।

कांग्रेस का समर्थन भी क्यों काफी नहीं ?

कांग्रेस ने DMK गठबंधन से अलग होकर TVK को समर्थन दिया है। कांग्रेस के पांच विधायकों के साथ TVK का आंकड़ा 112 तक पहुंचता है, लेकिन बहुमत के लिए अभी भी छह सीटें कम हैं। TVK लगातार VCK, CPI, CPI(M) और IUML जैसे दलों से संपर्क में है, लेकिन अभी तक कोई स्पष्ट समर्थन सामने नहीं आया है। IUML पहले ही TVK का समर्थन करने से इनकार कर चुकी है, जबकि CPI(M) और अन्य वाम दल फिलहाल “स्थिति पर नजर” बनाए हुए हैं।

सामूहिक इस्तीफे की रणनीति क्यों ?

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार अगर TVK वास्तव में अपने 107 विधायकों से इस्तीफा दिलाती है, तो यह तमिलनाडु की राजनीति में अभूतपूर्व स्थिति होगी।

विधानसभा की वैधता पर सवाल खड़े कर सकता है,

बड़े पैमाने पर उपचुनाव की स्थिति पैदा कर सकता है,

और पूरे राज्य में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ा सकता है।

हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि यह रणनीति फिलहाल राजनीतिक दबाव बनाने का तरीका ज्यादा लगती है, क्योंकि सामूहिक इस्तीफे का फैसला TVK के लिए भी बड़ा जोखिम हो सकता है।

विजय के सामने सबसे बड़ी चुनौती

विजय ने फिल्मों में अक्सर ऐसे किरदार निभाए हैं जो व्यवस्था के खिलाफ लड़ते हैं और अंत में जीतते हैं।लेकिन वास्तविक राजनीति में संख्या, गठबंधन और संवैधानिक प्रक्रियाएं किसी फिल्मी पटकथा से कहीं अधिक जटिल होती हैं। TVK की सबसे बड़ी चुनौती अब यह है कि वह “जनादेश की नैतिक ताकत” को “संख्यात्मक बहुमत” में कैसे बदले।

क्या फ्लोर टेस्ट ही समाधान है ?

कई संवैधानिक विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा संकट का सबसे साफ समाधान फ्लोर टेस्ट हो सकता है। अगर राज्यपाल विजय को सरकार बनाने का मौका देते और विधानसभा में बहुमत साबित करने को कहते, तो राजनीतिक अनिश्चितता जल्दी खत्म हो सकती थी।

इसी वजह से विपक्षी दल और कई कानूनी विशेषज्ञ लगातार यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या राज्यपाल का रवैया संविधान की भावना के अनुरूप है।

तमिलनाडु की राजनीति का नया दौर

2026 का चुनाव यह स्पष्ट कर चुका है कि तमिलनाडु की राजनीति अब केवल DMK बनाम AIADMK तक सीमित नहीं रही। TVK ने यह साबित कर दिया कि जनता पारंपरिक द्रविड़ राजनीति से अलग विकल्प तलाश रही है। लेकिन सबसे बड़ी पार्टी बनना और स्थिर सरकार बनाना दो अलग चीजें हैं। विजय अब उसी कठिन राजनीतिक परीक्षा से गुजर रहे हैं जिसका सामना भारत में कई क्षेत्रीय नेताओं ने पहले भी किया है।

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आगे क्या हो सकता है ?

अगले कुछ दिन तमिलनाडु की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे। संभावनाएं कई हैं

TVK अतिरिक्त समर्थन जुटा ले

राज्यपाल किसी अन्य गठबंधन को मौका दें

विधानसभा में फ्लोर टेस्ट कराया जाए

या राजनीतिक गतिरोध और गहरा जाए

फिलहाल इतना साफ है कि तमिलनाडु में सत्ता की लड़ाई अब केवल संख्या की नहीं, बल्कि जनादेश की व्याख्या की लड़ाई बन चुकी है।

Admin Desk

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