BREAKING :
EV खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर! Tata Power का चार्जिंग नेटवर्क अब 700 शहरों तक पहुंचा प्रेग्नेंसी का पता चलने से पहले ले ली Ozempic? Harvard की नई रिपोर्ट में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई सीतापुर में बनेगा 250 MW सोलर प्लांट राजनाथ सिंह की मंजूरी सेना को मिलेगी 24x7 ग्रीन बिजली World Cup 2026 विवाद ईरान के फैंस का टिकट कोटा रोका गया FIFA पर बढ़ा दबाव 8000mAh बैटरी वाला Tecno Pova 8 आ रहा है! 11 जून लॉन्च कीमत जानकर चौंक जाएंगे TMC को बड़ा झटका सुखेंदु शेखर रॉय ने छोड़ी पार्टी भाजपा में जाने के संकेत ₹44,490 में मिल रही इलेक्ट्रic स्कूटर! Hero, TVS, Bajaj और Ather में कौन है सबसे सस्ता? भारत में लॉन्च हुआ E85 फ्यूल! पेट्रोल से ₹20 सस्ता बदल सकता है कार चलाने का पूरा गणित 15 साल बाद DTC की धमाकेदार वापसी! अयोध्या-वैष्णो देवी के लिए वोल्वो बसें 2800 नई ई-बसों का ऐलान अपराजिता आढ्य बोलीं काम के लालच में होती तो कभी बेरोजगार नहीं रहती'

युद्ध की आग और तेल की राहत – क्या मोदी सरकार का एक्साइज ड्यूटी कट बचा पाएगा आपकी जेब?

मध्य-पूर्व में युद्ध की भीषण आग के बीच मोदी सरकार ने भारतीय जनता को महंगाई से बचाने के लिए पेट्रोल-डीज़ल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अंतरराष्ट्रीय तेल संकट पर चिंता जताते हुए इसे 'जनता के हित में लिया गया फैसला' बताया है। लेकिन क्या तेल कंपनियां इस कटौती का फायदा आम आदमी को देंगी या युद्ध के कारण बढ़ते घाटे की भरपाई करेंगी?
युद्ध की आग और तेल की राहत – क्या मोदी सरकार का एक्साइज ड्यूटी कट बचा पाएगा आपकी जेब?

 युद्ध और भारत का आर्थिक कवच

मध्य-पूर्व (Middle East) में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकाबंदी और युद्ध की आशंका के बीच कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतें 122 डॉलर प्रति बैरल के खतरनाक स्तर पर पहुँच गई हैं। ऐसे में भारत जैसे देश के लिए, जो अपनी जरूरत का 80% तेल आयात करता है, महंगाई का बड़ा खतरा पैदा हो गया था। शुक्रवार को केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए पेट्रोल और डीज़ल पर एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपये प्रति लीटर की भारी कटौती का ऐलान किया है।

आंकड़ों का गणित: अब कितना टैक्स लगेगा?

सरकार के इस फैसले के बाद केंद्र द्वारा वसूले जाने वाले करों (Excise Duty) में ऐतिहासिक बदलाव आया है:

• पेट्रोल: पहले पेट्रोल पर टैक्स अधिक था, जिसे अब घटाकर मात्र 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।

• डीज़ल: डीज़ल, जो ट्रांसपोर्ट और खेती की जान है, उस पर एक्साइज ड्यूटी को घटाकर शून्य (Zero) कर दिया गया है।

Must Read TMC को बड़ा झटका सुखेंदु शेखर रॉय ने छोड़ी पार्टी भाजपा में जाने के संकेत TMC को बड़ा झटका सुखेंदु शेखर रॉय ने छोड़ी पार्टी भाजपा में जाने के संकेत

• अंतर: यह कदम पिछले 4 वर्षों में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से अब तक की सबसे बड़ी कर कटौती मानी जा रही है।

अंतरराष्ट्रीय संकट: क्यों बढ़ीं कीमतें?

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक विस्तृत पोस्ट के जरिए दुनिया के हालात बयां किए:

• कच्चे तेल में उछाल: पिछले एक महीने में कच्चा तेल 70 डॉलर से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल हो गया है।

• दुनिया का हाल: दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों में तेल की कीमतें 30-50% तक बढ़ी हैं, वहीं यूरोप में 20% और अफ्रीका में 50% तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

Also Read अब सिफारिश नहीं मेरिट का दौर मोदी सरकार के 12 साल पर जितेंद्र सिंह का बड़ा दावा अब सिफारिश नहीं मेरिट का दौर मोदी सरकार के 12 साल पर जितेंद्र सिंह का बड़ा दावा

• भारत की रणनीति: मंत्री पुरी के अनुसार, सरकार के पास दो रास्ते थे—या तो बाकी देशों की तरह जनता पर बोझ डाल दिया जाए, या सरकार खुद नुकसान सहकर जनता को महंगाई से बचाए। भारत ने दूसरा रास्ता चुना।

कड़वी सच्चाई: क्या वाकई कम होंगे पेट्रोल के दाम?

यहाँ एक बड़ा पेंच (Twist) है। विशेषज्ञों और तेल उद्योग (Oil Marketing Companies - OMCs) के सूत्रों का कहना है कि यह कटौती शायद सीधे आपकी जेब तक न पहुँचे। इसके पीछे के कारण निम्नलिखित हैं:

• कंपनियों का घाटा: अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी के कारण इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी कंपनियां फिलहाल 48.8 रुपये प्रति लीटर का घाटा सह रही हैं।

• एब्जॉर्प्शन (Absorption): सरकार द्वारा कम की गई 10 रुपये की ड्यूटी का उपयोग ये कंपनियां अपने इसी घाटे की भरपाई के लिए करेंगी। सरल शब्दों में, यह कटौती पेट्रोल पंप पर दाम कम करने के बजाय, दाम को 'बढ़ने से रोकने' के लिए इस्तेमाल की जाएगी।

• महंगाई का दबाव: अगर सरकार यह कटौती न करती, तो कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण पेट्रोल के दाम देश के कई हिस्सों में 150-160 रुपये तक पहुँच सकते थे।

 

विपक्ष और विशेषज्ञों की राय

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि डीज़ल पर ड्यूटी को शून्य करना एक मास्टरस्ट्रोक है। चूंकि ट्रक और मालवाहक गाड़ियाँ डीज़ल से चलती हैं, इसलिए डीज़ल के दाम स्थिर रहने से फल, सब्जी और अन्य जरूरी सामानों की कीमतों में ज्यादा उछाल नहीं आएगा। हालांकि, विपक्ष का तर्क है कि सरकार को इसका सीधा फायदा जनता की जेब में पहुँचाना चाहिए था।

 भविष्य की राह: आगे क्या होगा?

अगर युद्ध लंबा खिंचता है और कच्चा तेल 130-140 डॉलर के पार जाता है, तो सरकार के पास एक्साइज ड्यूटी घटाने का और विकल्प नहीं बचेगा (क्योंकि डीज़ल पर तो पहले ही जीरो हो चुका है)। ऐसी स्थिति में देश को वैकल्पिक ऊर्जा (EV और एथेनॉल) की ओर तेजी से बढ़ना होगा 

मध्य-पूर्व में युद्ध की भीषण आग के बीच मोदी सरकार ने भारतीय जनता को महंगाई से बचाने के लिए पेट्रोल-डीज़ल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अंतरराष्ट्रीय तेल संकट पर चिंता जताते हुए इसे 'जनता के हित में लिया गया फैसला' बताया है। लेकिन क्या तेल कंपनियां इस कटौती का फायदा आम आदमी को देंगी या युद्ध के कारण बढ़ते घाटे की भरपाई करेंगी?

 

Disclaimer 
 यह रिपोर्ट वर्तमान में चल रही अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक (Geopolitical) स्थितियों, सरकारी घोषणाओं और तेल उद्योग (OMCs) के सूत्रों से प्राप्त आंकड़ों के विस्तृत विश्लेषण पर आधारित है। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव (Volatility) के कारण, पेट्रोल-डीज़ल की अंतिम खुदरा कीमतों (Retail Prices) में शहर-दर-शहर बदलाव हो सकता है। यह लेख पाठकों को केवल शिक्षित करने और वर्तमान रुझानों (Current Trends) से अवगत कराने के लिए है। "देश Tv24" किसी भी पाठक को निवेश या व्यावसायिक सलाह नहीं देता है।

Admin Desk

Admin Desk

I am senior editor of this News Portal. Me and my team verify all news with trusted sources and publish here.

Home Shorts

Categories