कोलकाता/गुवाहाटी। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की उलटी गिनती शुरू होते ही असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा देश की सबसे चर्चित राजनीतिक शख्सियतों में से एक बन गए हैं। बंगाल में उनका प्रचार अभियान तेज है, बयान आक्रामक हैं और संदेश स्पष्ट यह चुनाव सिर्फ एक राज्य का नहीं, पूरे पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत का भविष्य तय करेगा।
हर भारतीय की हिस्सेदारी है इस चुनाव में
कोलकाता में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरमा ने कहा कि बंगाल चुनाव कोई सामान्य राज्य चुनाव नहीं है। उन्होंने इसे "सभ्यतागत महत्व" वाला चुनाव बताया और कहा कि बांग्लादेशी घुसपैठ का असर केवल बंगाल तक सीमित नहीं यह झारखंड, बिहार और आगे पूरे देश को प्रभावित कर रहा है।
"हर भारतीय की इस चुनाव में हिस्सेदारी है। घुसपैठ का असर सिर्फ बंगाल और असम तक नहीं रहता यह झारखंड, बिहार और दूसरे राज्यों तक फैल रहा है," उन्होंने कहा।
TMC द्वारा BJP नेताओं को 'बाहरी' कहे जाने के जवाब में सरमा ने पलटवार किया कि बंगाल के नेता भी दूसरे राज्यों में जाते हैं और यह सवाल उठाना राजनीतिक दिखावा है।
घुसपैठ और जनसांख्यिकी सरमा का मुख्य मुद्दा
सरमा ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर बंगाल की स्थिति को आंकड़ों से समझाया। उन्होंने बताया कि भारत की कुल बांग्लादेश सीमा का 54 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम बंगाल के साथ लगता है जबकि त्रिपुरा की हिस्सेदारी 21 प्रतिशत, मेघालय की 11 प्रतिशत, मिजोरम की 8 प्रतिशत और असम की मात्र 6 प्रतिशत है।
"अगर एक भी सीमा खुली रहती है, तो उसका असर बाकी सभी राज्यों पर पड़ता है," सरमा ने कहा।
उन्होंने आरोप लगाया कि मालदा और मुर्शिदाबाद जिलों से घुसपैठिए बंगाल को गलियारे के रूप में इस्तेमाल कर असम और देश के अन्य हिस्सों तक पहुंच रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उत्तर दिनाजपुर, मालदा, मुर्शिदाबाद, दक्षिण-उत्तर 24 परगना, जलपाईगुड़ी, कूचबिहार और नदिया जैसे सीमावर्ती जिलों में मतदाता सूचियों में असामान्य बढ़ोतरी हुई है।
India TV को दिए एक विशेष internet view में सरमा ने TMC की आलोचना पर पलटवार करते हुए कहा, "आग तो पहले ही लग चुकी है। अब उसे बुझाने की जरूरत है।" उन्होंने जनसांख्यिकीय बदलाव को "प्राकृतिक नहीं बल्कि हेरफेर का नतीजा" बताया।
फेंसिंग पर TMC पर आरोप
सरमा ने आरोप लगाया कि असम ने अपनी सीमा पर 100 प्रतिशत फेंसिंग पूरी कर ली है और त्रिपुरा में काम जारी है लेकिन पश्चिम बंगाल एकमात्र राज्य है जहां यह काम नहीं हो रहा।
उनके अनुसार TMC सरकार जानबूझकर BSF को जमीन देने से इनकार कर रही है, बावजूद इसके कि अदालत के निर्देश हैं। उन्होंने इसके पीछे वोट बैंक की राजनीति के साथ-साथ गाय तस्करी और ड्रग ट्रैफिकिंग से जुड़े आर्थिक हितों को जिम्मेदार बताया।
उन्होंने एक ठोस प्रस्ताव भी रखा अगर बंगाल में BJP सरकार बनती है, तो वे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से बंगाल, असम, त्रिपुरा, मेघालय और मिजोरम के मुख्यमंत्रियों की संयुक्त टास्क फोर्स बनाने का अनुरोध करेंगे।
चुनावी दावे 200 सीटें जीतेगी BJP ?
सरमा ने दावा किया कि BJP बंगाल में 200 से अधिक सीटें जीत सकती है। उन्होंने पहले चरण की लगभग 93 प्रतिशत मतदान प्रतिशत को अपने दावे का आधार बनाया और कहा कि इतना अधिक मतदान दर्शाता है कि डर का माहौल नहीं है और लोग खुलकर BJP के समर्थन में आ रहे हैं।
असम के संदर्भ में भी उन्होंने आंकड़े दिए 126 में से 100 से अधिक सीटें जीतने का दावा किया।
हालांकि, चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल में 200 सीटों तक पहुंचना BJP के लिए आसान नहीं होगा। TMC की जमीनी पकड़ और ममता बनर्जी की व्यक्तिगत लोकप्रियता अभी भी बड़ी चुनौती है।
'असम मॉडल एक नई राष्ट्रीय पहचान
सरमा की बंगाल में सक्रियता केवल प्रचार नहीं BJP इसके जरिए एक बड़ा संदेश देना चाहती है। पार्टी के भीतर इसे "असम मॉडल" कहा जाता है विकास, सुरक्षा और क्षेत्रीय एकीकरण पर आधारित शासन की एक अवधारणा।
सरमा के मुख्यमंत्री बनने के बाद असम में बुनियादी ढांचे, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और प्रशासनिक समन्वय में सुधार को इस मॉडल की बुनियाद माना जाता है। इससे पहले झारखंड और ओडिशा चुनावों में भी सरमा को अहम जिम्मेदारी दी गई थी।
आर्थिक मोर्चे पर सरमा ने दावा किया कि असम 12 प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ रहा है जबकि बंगाल की विकास दर 9 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि ओडिशा पहले ही कई प्रमुख आर्थिक संकेतकों में बंगाल को पीछे छोड़ चुका है और असम दो वर्षों में प्रति व्यक्ति आय में बंगाल को पार कर लेगा।
पूर्वोत्तर से राष्ट्रीय राजनीति तक सरमा का उभार
बंगाल में सरमा की बढ़ती भूमिका BJP की केंद्रीय रणनीति का हिस्सा है। पार्टी उन्हें पूर्वोत्तर से आगे एक राष्ट्रीय नेता के रूप में स्थापित करना चाहती है।
असम इकाई के कई नेता और कार्यकर्ता इस बार बंगाल की विभिन्न विधानसभा सीटों पर सीधे जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं जो इस बात का संकेत है कि यह प्रयास व्यक्तिगत नहीं, संगठनात्मक है।
दशकों तक पूर्वोत्तर को राष्ट्रीय राजनीति में हाशिये पर माना जाता था। अब BJP असम को एक "नीतिगत नवाचार का केंद्र" के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है और सरमा इस कोशिश का सबसे दृश्यमान चेहरा हैं।
आम लोगों पर असर यह चुनाव क्यों मायने रखता है ?
बंगाल की सीमा से सटे जिलों के लिए यह चुनाव केवल सरकार बदलने का सवाल नहीं है। घुसपैठ, जमीन विवाद, रोजगार पर दबाव और सांप्रदायिक तनाव ये मुद्दे आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी को सीधे प्रभावित करते हैं।
अगर BJP सत्ता में आती है और पांच राज्यों की संयुक्त टास्क फोर्स बनती है, तो सीमा पर फेंसिंग, घुसपैठ पर नियंत्रण और कानूनी कार्रवाई में समन्वय की उम्मीद है। दूसरी ओर, TMC का कहना है कि BJP का यह पूरा एजेंडा असली मुद्दों महंगाई, बेरोजगारी और स्वास्थ्य से ध्यान हटाने का प्रयास है।
आगे क्या ?
बंगाल में मतदान के बाद चुनाव परिणाम जब आएंगे, तब यह तय होगा कि सरमा का प्रचार और 'असम मॉडल' की रणनीति कितनी कारगर रही।
लेकिन इस चुनाव से इतर एक बात स्पष्ट है हिमंता बिस्वा सरमा अब केवल असम के मुख्यमंत्री नहीं रहे। वे BJP की पूर्वी भारत रणनीति के केंद्र में हैं और पार्टी उन्हें एक राष्ट्रीय नेता के रूप में आगे बढ़ा रही है।
घुसपैठ, जनसांख्यिकी और सीमा सुरक्षा ये मुद्दे आने वाले वर्षों में भारतीय राजनीति में और केंद्रीय होते जाएंगे। इस चुनाव की जीत या हार, दोनों ही स्थितियों में इन सवालों का जवाब ढूंढना जरूरी होगा।