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मन की बात परमाणु ऊर्जा से लेकर बांस क्रांति तक — PM मोदी ने गिनाईं देश की 10 बड़ी उपलब्धियां

मन की बात परमाणु ऊर्जा से लेकर बांस क्रांति तक — PM मोदी ने गिनाईं देश की 10 बड़ी उपलब्धियां

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 26 अप्रैल को 'मन की बात' के 133वें एपिसोड में देश की कई महत्वपूर्ण उपलब्धियों का जिक्र किया। कल्पक्कम के फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की 'क्रिटिकैलिटी', भारत की पवन ऊर्जा क्षमता का 56 गीगावॉट पार करना, जनगणना 2027 की तैयारियां और यूरोपियन गर्ल्स मैथमेटिकल ओलंपियाड में भारतीय बेटियों की शानदार सफलता इन सभी विषयों पर प्रधानमंत्री ने विस्तार से बात की।

कल्पक्कम रिएक्टर परमाणु ऊर्जा में ऐतिहासिक पड़ाव

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि तमिलनाडु के कल्पक्कम स्थित फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने 'क्रिटिकैलिटी' हासिल कर ली है। यह वह अवस्था होती है जब कोई परमाणु रिएक्टर पहली बार स्वयं को बनाए रखने वाली परमाणु श्रृंखला प्रतिक्रिया सफलतापूर्वक प्राप्त कर लेता है। इसी के साथ रिएक्टर परिचालन चरण में प्रवेश करता है।

इस रिएक्टर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बना है। 'ब्रीडर' नाम इसलिए है क्योंकि यह ऊर्जा उत्पन्न करने के साथ-साथ भविष्य के लिए नया ईंधन भी तैयार करता है यानी यह आत्मनिर्भर ऊर्जा का एक चक्र बनाता है।

मोदी ने याद दिलाया कि मार्च 2024 में उन्होंने स्वयं कल्पक्कम में इस रिएक्टर की 'कोर लोडिंग' देखी थी। भारत का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम तीन चरणों में बना है  पहले में यूरेनियम, दूसरे में प्लूटोनियम और तीसरे में थोरियम का उपयोग होता है। कल्पक्कम का यह रिएक्टर दूसरे चरण की सबसे बड़ी सफलता है।

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पवन ऊर्जा दुनिया में चौथा स्थान 56 GW पार

प्रधानमंत्री  ने बताया कि भारत की पवन ऊर्जा उत्पादन क्षमता अब 56 गीगावॉट से अधिक हो गई है। केवल पिछले एक वर्ष में लगभग 6 गीगावॉट की नई क्षमता जोड़ी गई। इस उपलब्धि के साथ भारत दुनिया में पवन ऊर्जा क्षमता में चौथे स्थान पर आ गया है।

गुजरात, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और राजस्थान इस क्षेत्र में अग्रणी राज्य हैं। गुजरात के कच्छ, पाटन और बनासकांठा जैसे इलाकों में जहां कभी केवल रेगिस्तान था आज बड़े नवीकरणीय ऊर्जा पार्क बन रहे हैं। इन पार्कों से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी खुल रहे हैं।

जनगणना 2027 पहली बार पूरी तरह डिजिटल

मोदी ने बताया कि देश में जनगणना 2027 का काम शुरू हो चुका है और यह अब तक की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी। जनगणनाकर्मियों के पास मोबाइल एप होगा जिसमें वे घर-घर जाकर जानकारी दर्ज करेंगे।

इस बार नागरिक खुद भी अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। यह सुविधा जनगणनाकर्मी के आने से 15 दिन पहले खुलेगी। जानकारी भरने के बाद एक विशेष ID मिलेगी  मोबाइल या ईमेल पर जिसे जनगणनाकर्मी के आने पर दिखाना होगा। इससे दोबारा जानकारी देने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

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अब तक जिन राज्यों में स्व-गणना पूरी हो चुकी है, वहां जनगणना कर्मचारियों ने घरों की सूचीकरण भी शुरू कर दी है। अब तक करीब 1 करोड़ 20 लाख परिवारों का हाउस लिस्टिंग पूरा हो चुका है। प्रधानमंत्री ने नागरिकों को आश्वस्त किया कि दी गई जानकारी पूरी तरह सुरक्षित, गोपनीय और डिजिटल सुरक्षा से संरक्षित रहेगी।

 ओलंपियाड में बेटियों ने रचा इतिहास

इस महीने फ्रांस के बोर्डो में आयोजित यूरोपियन गर्ल्स मैथमेटिकल ओलंपियाड में भारतीय टीम ने अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। चार सदस्यीय टीम मुंबई की श्रेया मुंढ्रा, तिरुवनंतपुरम की संजना चाको, चेन्नई की शिवानी भरत कुमार और कोलकाता की श्रीमयी बेरा ने विश्व में छठा स्थान प्राप्त किया।

श्रेया मुंढ्रा ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा। संजना को रजत और शिवानी को कांस्य पदक मिला। यह प्रतियोगिता साढ़े चार घंटे में कठिन गणितीय प्रश्नों को हल करने की होती है और दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में से एक मानी जाती है।

भारत में इस ओलंपियाड के लिए चयन प्रक्रिया बेहद कठिन है क्षेत्रीय, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर चुनौतियां पार करने के बाद टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च के होमी भाभा सेंटर फॉर साइंस एजुकेशन में एक महीने का गणित प्रशिक्षण शिविर होता है। देशभर से हर साल लगभग 6 लाख छात्र इस गणित ओलंपियाड कार्यक्रम में हिस्सा लेते हैं।

नेशनल आर्काइव्स 20 करोड़ दस्तावेज ऑनलाइन

नेशनल आर्काइव्स ऑफ इंडिया ने 20 करोड़ से अधिक ऐतिहासिक दस्तावेजों को डिजिटाइज कर www.abhilekh-patal.in पर सार्वजनिक किया है। इनमें 7वीं सदी की गिलगित पांडुलिपियां, 8वीं सदी का श्री भुवलय ग्रंथ, रानी लक्ष्मीबाई से जुड़े 1857 के पत्र, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिंद फौज से संबंधित दस्तावेज तथा पंडित मदन मोहन मालवीय और BHU की स्थापना से जुड़ी सामग्री शामिल है। संविधान सभा से जुड़े दुर्लभ दस्तावेज भी इस पोर्टल पर उपलब्ध हैं।

पूर्वोत्तर में बांस क्रांति रोजगार और नवाचार का नया अध्याय

प्रधानमंत्री ने बताया कि 2017 में कानून बदलकर बांस को 'पेड़' की श्रेणी से बाहर किए जाने के बाद पूर्वोत्तर में बांस आधारित उद्योग तेजी से फल-फूल रहा है। त्रिपुरा के गोमती जिले के बिजय सूत्रधार और साउथ त्रिपुरा के प्रदीप चक्रवर्ती जैसे उद्यमियों ने तकनीक का उपयोग कर बांस उत्पादों की गुणवत्ता और मात्रा दोनों बढ़ाई हैं।

नागालैंड के दीमापुर में कई स्वयं सहायता समूह बांस आधारित खाद्य उत्पादों में मूल्य संवर्धन कर रहे हैं। मिजोरम के ममित जिले में बांस टिश्यू कल्चर पर काम हो रहा है। सिक्किम के गंगटोक के पास लागस्टल बांस एंटरप्राइज टीम हस्तशिल्प, अगरबत्ती, फर्नीचर और इंटीरियर डेकोर बना रही है।

भारतीय चीज को अंतरराष्ट्रीय पहचान

ब्राजील में आयोजित अंतरराष्ट्रीय चीज प्रतियोगिता में दो भारतीय चीज ब्रांडों को प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले। मोदी ने बताया कि जम्मू-कश्मीर का कलारी चीज जिसे 'कश्मीर का मोजरेला' कहा जाता है  गुज्जर-बकरवाल समुदाय द्वारा सदियों से बनाया जा रहा है। सिक्किम, अरुणाचल और लद्दाख में याक के दूध से बना 'छुर्पी' चीज लोकप्रिय है। महाराष्ट्र और गुजरात में 'टोपली नु पनीर' यानी 'सूरती चीज' की अपनी अलग पहचान है। आधुनिक तकनीक और बेहतर पैकेजिंग के साथ भारतीय चीज अब वैश्विक बाजारों में पहुंच रहा है।

प्रकृति संरक्षण और बौद्ध संदेश

मोदी ने बताया कि कर्नाटक का कर्मा मोनेस्ट्री 100 एकड़ में फैला वन क्षेत्र है जहां 700 से अधिक देसी पेड़ संरक्षित हैं। कच्छ के रण में हर मानसून के बाद लाखों फ्लेमिंगो आते हैं और पूरा इलाका गुलाबी हो जाता है, इसीलिए इसे 'फ्लेमिंगो सिटी' कहते हैं। उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र में 'गज मित्र' पहल के तहत ग्रामीण खुद हाथियों की निगरानी करते हैं। छत्तीसगढ़ में काला हिरण फिर से दिखने लगा है और राजस्थान में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण) के संरक्षण के लिए ब्रीडिंग सेंटर स्थापित किए गए हैं।

बुद्ध पूर्णिमा के उपलक्ष्य में मोदी ने चिली के कोचिगुआज घाटी में लद्दाख के द्रुपन ओत्जर रिनपोछे के मार्गदर्शन में चल रहे बौद्ध ध्यान केंद्र का उल्लेख किया और कहा कि भारत की प्राचीन धारा पूरी दुनिया तक पहुंच रही है।

'मन की बात' के इस एपिसोड में प्रधानमंत्री ने देश की विज्ञान, पर्यावरण, संस्कृति और ग्रामीण उद्यमिता से जुड़ी उपलब्धियों को एक साथ सामने रखा। कल्पक्कम रिएक्टर की सफलता और पवन ऊर्जा में चौथे स्थान की उपलब्धि खासतौर पर उल्लेखनीय हैं क्योंकि ये दोनों भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में ठोस कदम हैं।

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