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राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों ने छोड़ी पार्टी, भाजपा में होंगे शामिल; अन्ना हजारे बोले- नेतृत्व की गलती

राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों ने छोड़ी पार्टी, भाजपा में होंगे शामिल; अन्ना हजारे बोले- नेतृत्व की गलती

भारतीय राजनीति में शनिवार को उस समय एक बड़ा भूचाल आ गया जब आम आदमी पार्टी (AAP) के दिग्गज नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। चड्ढा अकेले नहीं हैं; उनके साथ 'आप' के 6 अन्य सांसदों ने भी पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है। यह समूह अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने जा रहा है। इस घटनाक्रम ने न केवल राज्यसभा में शक्ति संतुलन को बदल दिया है, बल्कि पंजाब और गुजरात जैसे राज्यों में भी आम आदमी पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को हिलाकर रख दिया है।

photo credit: orPTI

 

भ्रष्टाचार के आरोपों के साथ चड्ढा का प्रहार

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राघव चड्ढा काफी आक्रामक नजर आए। उन्होंने अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। चड्ढा ने कहा, "मैंने अपने जीवन के 15 साल इस पार्टी को दिए। हम एक आंदोलन से निकले थे जिसका मकसद ईमानदारी की राजनीति करना था, लेकिन आज 'आप' पूरी तरह से भ्रष्टाचार में डूब चुकी है। यह अब वह पुरानी पार्टी नहीं रही। मैं इस गलत काम का हिस्सा नहीं बने रहना चाहता, इसलिए मैं जनता के करीब जा रहा हूं।"

37 वर्षीय नेता ने स्पष्ट किया कि पार्टी के भीतर अब वैचारिक मतभेदों की जगह व्यक्तिगत हितों ने ले ली है। गौरतलब है कि इस महीने की शुरुआत में 'आप' ने चड्ढा को राज्यसभा में उप-नेता के पद से हटा दिया था, जिसके बाद से ही उनके और शीर्ष नेतृत्व के बीच दरार खुलकर सामने आ गई थी।

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अन्ना हजारे की टिप्पणी नेतृत्व को आत्ममंथन की जरूरत

इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम पर भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के प्रणेता अन्ना हजारे की भी प्रतिक्रिया आई है। महाराष्ट्र के अहिल्यानगर (पूर्व नाम अहमदनगर) में मीडिया से बात करते हुए अन्ना ने इसे लोकतंत्र का हिस्सा बताया, लेकिन साथ ही केजरीवाल नेतृत्व पर सवाल भी उठाए।

अन्ना हजारे ने कहा, "लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी राय रखने और राजनीतिक निर्णय लेने का अधिकार है। अगर राघव चड्ढा और अन्य सांसदों ने पार्टी छोड़ी है, तो निश्चित रूप से उन्हें वहां कोई परेशानी रही होगी। यह पूरी तरह से पार्टी नेतृत्व की गलती है। अगर पार्टी सही रास्ते पर चलती, तो ये लोग उसे छोड़कर कभी नहीं जाते।"

अन्ना और केजरीवाल के बीच 2011 के जनलोकपाल आंदोलन के दौरान गहरा जुड़ाव रहा था, लेकिन बाद में केजरीवाल के राजनीति में आने के फैसले के बाद दोनों के रास्ते अलग हो गए थे। अन्ना का यह बयान 'आप' के लिए एक नैतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है।

संसदीय  कानूनी पेच

राघव चड्ढा के साथ 6 सांसदों का जाना 'आप' के लिए तकनीकी रूप से भी विनाशकारी है। राज्यसभा में आम आदमी पार्टी की कुल ताकत का लगभग दो-तिहाई हिस्सा अब टूट चुका है।

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दलबदल कानून से बचाव: नियमानुसार, यदि किसी विधायी दल के दो-तिहाई सदस्य एक साथ टूटकर किसी दूसरी पार्टी में मिलते हैं या अलग गुट बनाते हैं, तो उन पर दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत अयोग्यता का खतरा कम हो जाता है।

राज्यसभा का समीकरण: चड्ढा के इस कदम से उच्च सदन में भाजपा की स्थिति और मजबूत होगी, जबकि विपक्ष का एक प्रमुख स्वर कमजोर पड़ जाएगा।

पंजाब और गुजरात की राजनीति पर असर

राघव चड्ढा पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं और वहां की राजनीति में उनकी गहरी पैठ मानी जाती है। उनके जाने से पंजाब की भगवंत मान सरकार और संगठन के बीच तालमेल पर सवाल उठने लगे हैं।

पंजाब: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने चड्ढा के जाने पर तंज कसते हुए एक 'सब्जी' से संबंधित पोस्ट साझा की, जिसे भाजपा ने सांसदों का अपमान करार दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब में कैडर के बीच यह संदेश जाएगा कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है।

गुजरात: गुजरात में भी 'आप' ने पिछले विधानसभा चुनावों में अच्छी उपस्थिति दर्ज कराई थी। सांसदों के इस सामूहिक इस्तीफे का असर वहां के स्थानीय नेताओं के मनोबल पर भी पड़ना तय है।

पार्टी का रुख

आम आदमी पार्टी ने इन इस्तीफों को पंजाब की जनता के साथ 'विश्वासघात' बताया है। पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि यह सब भाजपा द्वारा प्रायोजित है और राघव चड्ढा केवल अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के लिए जा रहे हैं। इससे पहले जब पार्टी ने चड्ढा का समय कम करने के लिए राज्यसभा सभापति को पत्र लिखा था, तब चड्ढा ने इसे अपने खिलाफ एक "स्क्रिप्टेड अभियान" बताया था।

एक रोचक विवरण यह भी सामने आया है कि एक सांसद, जिन्होंने पिछले एक साल से अरविंद केजरीवाल को अपने आवास पर ठहराया था, उन्होंने केजरीवाल के वहां से निकलते ही कुछ घंटों के भीतर पार्टी से इस्तीफा दे दिया। इससे पता चलता है कि भीतरखाने नाराजगी कितनी गहरी थी।

राघव चड्ढा का भाजपा में जाना केवल एक व्यक्ति का दलबदल नहीं है, बल्कि यह आम आदमी पार्टी के उस 'ईमानदारी' वाले नैरेटिव पर हमला है जिसे लेकर वह सत्ता में आई थी। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या 'आप' अपने बचे हुए कुनबे को संभाल पाती है या यह बिखराव अन्य राज्यों में भी फैलेगा। फिलहाल, 2026 के राजनीतिक परिदृश्य में यह अब तक का सबसे बड़ा सत्ता परिवर्तन माना जा रहा है।

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