पटना: बिहार की राजनीति में हाल ही में बड़ा बदलाव देखने को मिला है और अब राज्य की कमान भारतीय जनता पार्टी के हाथों में है। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद सम्राट चौधरी आज पहली बार दिल्ली दौरे पर जा रहे हैं। इस दौरे को सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि आने वाले दिनों की राजनीति की दिशा तय करने वाला कदम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री बनने के बाद सम्राट चौधरी की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से यह पहली मुलाकात होगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बैठक में बिहार सरकार के भविष्य की रणनीति, कैबिनेट विस्तार और संगठनात्मक संतुलन जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
पहली मुलाकात, लेकिन कई बड़े संकेत
दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से होने वाली मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया जा रहा है, लेकिन इसके मायने इससे कहीं ज्यादा गहरे हैं। बिहार में सत्ता परिवर्तन के बाद केंद्र और राज्य के बीच तालमेल को मजबूत करना बेहद जरूरी है। ऐसे में यह मुलाकात दोनों स्तर पर समन्वय को बेहतर बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
इसके बाद सम्राट चौधरी की गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात प्रस्तावित है। अमित शाह भाजपा के संगठन और रणनीति के सबसे महत्वपूर्ण चेहरे माने जाते हैं, इसलिए उनके साथ होने वाली बातचीत को कैबिनेट विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है।
कैबिनेट विस्तार सबसे बड़ा मुद्दा
बिहार में नई सरकार बनने के बाद अभी तक कैबिनेट का पूरा गठन नहीं हो पाया है। वर्तमान में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के अलावा केवल दो उपमुख्यमंत्री—जेडीयू के बिजेंद्र प्रसाद यादव और विजय चौधरी—ही शपथ ले चुके हैं। ऐसे में सरकार के अधिकांश विभाग अभी खाली हैं।
संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार बिहार में मुख्यमंत्री समेत कुल 36 मंत्री बनाए जा सकते हैं। इस हिसाब से अभी 33 पद खाली हैं। यही वजह है कि दिल्ली दौरे को कैबिनेट विस्तार की दिशा में निर्णायक माना जा रहा है।
जातीय और क्षेत्रीय समीकरण पर फोकस
बिहार की राजनीति में जातीय संतुलन हमेशा से अहम भूमिका निभाता रहा है। माना जा रहा है कि कैबिनेट विस्तार के दौरान भाजपा और जेडीयू दोनों ही दल सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नामों पर अंतिम मुहर लगाएंगे।
इसके साथ ही क्षेत्रीय संतुलन भी एक बड़ा फैक्टर होगा, ताकि राज्य के सभी हिस्सों को प्रतिनिधित्व मिल सके। दिल्ली में होने वाली बैठकों में इन सभी पहलुओं पर गहन चर्चा की संभावना है।
भाजपा के लिए नया दौर
नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बिहार में भाजपा नेतृत्व वाली सरकार का गठन एक बड़े राजनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही पार्टी के कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है।
यह पहली बार है जब भाजपा सीधे तौर पर बिहार की सत्ता की कमान संभाल रही है। ऐसे में पार्टी के सामने प्रशासनिक मजबूती के साथ-साथ जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की चुनौती भी है।
आगे की रणनीति पर नजर
दिल्ली दौरे के बाद सबसे बड़ी नजर इस बात पर रहेगी कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी कब तक कैबिनेट विस्तार करते हैं और किन नेताओं को मंत्री बनाया जाता है। इससे न सिर्फ सरकार की कार्यशैली का अंदाजा लगेगा, बल्कि आने वाले चुनावों की रणनीति भी साफ हो जाएगी।
फिलहाल बिहार की राजनीति की नजरें दिल्ली पर टिकी हुई हैं। सम्राट चौधरी का यह दौरा सिर्फ एक औपचारिक यात्रा नहीं, बल्कि राज्य की नई सरकार की दिशा और दशा तय करने वाला अहम पड़ाव साबित हो सकता है।