कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण के मतदान से ठीक पहले सूबे की सियासत अपने चरम पर पहुंच गई है। 29 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण के मतदान के लिए प्रचार के अंतिम सप्ताहांत में भारतीय जनता पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जहां मतुआ समुदाय को नागरिकता देने का बड़ा वादा किया है, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रोड शो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पदयात्राओं ने राज्य की राजधानी को चुनावी अखाड़े में तब्दील कर दिया है।
मतुआ समुदाय और नागरिकता का चुनावी दांव
पश्चिम बंगाल की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाने वाले मतुआ समुदाय को साधने के लिए भाजपा ने सीएए (नागरिकता संशोधन कानून) को अपना प्रमुख हथियार बनाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हालिया रैलियों में ममता सरकार पर इस कानून को जानबूझकर रोकने का आरोप लगाया। शाह ने मतदाताओं को भरोसा दिलाया कि 5 मई को राज्य में भाजपा की सरकार बनने के बाद मतुआ समुदाय के हर व्यक्ति को सम्मान के साथ भारतीय नागरिकता दी जाएगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बांग्लादेशी मूल के इस शरणार्थी समुदाय का झुकाव जिस ओर होता है, सीमावर्ती जिलों की दर्जनों सीटों पर जीत-हार का फैसला वहीं से होता है। शाह ने अप्रत्यक्ष रूप से यह संकेत दिया कि अब इस समुदाय को डर के साये में रहने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि नई सरकार उनके अधिकारों की सुरक्षा करेगी।
महिला सुरक्षा और 'आधी रात' की चुनौती
प्रचार के दौरान कानून-व्यवस्था, विशेषकर महिला सुरक्षा का मुद्दा केंद्र में रहा है। गृह मंत्री ने आरजी कर अस्पताल की घटना और संदेशखली जैसे मामलों का जिक्र करते हुए सत्तारूढ़ दल की घेराबंदी की। उन्होंने टीएमसी नेतृत्व के उन बयानों पर तंज कसा जिनमें महिलाओं को शाम के बाद घर से बाहर न निकलने की सलाह दी गई थी। शाह ने कहा कि भाजपा के शासन में सुरक्षा का स्तर ऐसा होगा कि कोई भी महिला रात के एक बजे भी बेखौफ बाहर निकल सकेगी।
इस बार भाजपा ने प्रतीकात्मक रूप से आरजी कर मामले की पीड़िता की मां को पानीहाटी सीट से मैदान में उतारा है, जो यह दर्शाता है कि पार्टी महिला सुरक्षा के मुद्दे को चुनावी नैरेटिव के शीर्ष पर रखना चाहती है।
कोलकाता की सड़कों पर मोदी का मेगा शो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को उत्तर कोलकाता में एक विशाल रोड शो के जरिए भाजपा के पक्ष में माहौल बनाएंगे। यह रोड शो जोराबगान से शुरू होकर खन्ना जंक्शन तक जाएगा, जो ऐतिहासिक रूप से शहर का सबसे व्यस्त और राजनीतिक रूप से जागरूक इलाका माना जाता है। पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं और रूट पर भारी फोर्स तैनात की गई है। भाजपा नेताओं का दावा है कि प्रधानमंत्री का यह दौरा कोलकाता की शहरी सीटों पर समीकरण बदल देगा, जो पारंपरिक रूप से टीएमसी का गढ़ रही हैं।
ममता बनर्जी की भवानीपुर में घेराबंदी
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी पारंपरिक सीट भवानीपुर और दक्षिण कोलकाता के अन्य क्षेत्रों में खुद कमान संभाल रखी है। उन्होंने चक्रमबेरिया और टालीगंज जैसे इलाकों में छोटी जनसभाओं और पदयात्राओं के जरिए मतदाताओं से सीधा संवाद किया है। ममता बनर्जी ने भाजपा पर राज्य की जनसांख्यिकी बदलने और केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। उन्होंने मतदाताओं से अपील की है कि वे बाहरी ताकतों के बजाय अपनी 'दीदी' पर भरोसा रखें। टीएमसी इस बार 'लक्ष्मी भंडार' जैसी अपनी कल्याणकारी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है।
राहुल गांधी की रैलियों पर सियासी खींचतानी
विपक्ष के एक अन्य महत्वपूर्ण चेहरे राहुल गांधी के बंगाल दौरे को लेकर प्रशासन और कांग्रेस के बीच तकरार देखी गई। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि कोलकाता के शहीद मीनार और मटियाब्रुज में होने वाली राहुल गांधी की रैलियों को पहले अनुमति नहीं दी गई, जिससे उनके कार्यक्रमों में देरी हुई। हालांकि, राहुल गांधी ने शनिवार को सभाओं को संबोधित करते हुए राज्य की कानून-व्यवस्था और केंद्र की आर्थिक नीतियों, दोनों पर प्रहार किया। कांग्रेस इस चुनाव में वाम दलों के साथ गठबंधन कर अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की कोशिश कर रही है।
दूसरे चरण का समीकरण और जनसांख्यिकीय बदलाव
29 अप्रैल को दूसरे चरण में 142 सीटों पर मतदान होना है। इससे पहले 23 अप्रैल को हुए प्रथम चरण में 152 सीटों पर करीब 92 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था, जो राज्य में सत्ता विरोधी लहर और भारी उत्साह दोनों का संकेत माना जा रहा है। भाजपा का दावा है कि वे पहले ही चरण में 110 सीटों का आंकड़ा पार कर चुके हैं, जबकि टीएमसी इस दावे को मनोवैज्ञानिक युद्ध करार दे रही है। इस बार का चुनाव 'सोनार बांग्ला' और 'बंगाल की बेटी' के नारों के बीच एक ऐसी लड़ाई में बदल गया है, जहां मतदाता खामोश है लेकिन मुद्दों की फेहरिस्त लंबी है।
क्या होगा अगला कदम ?
प्रचार का शोर सोमवार शाम 6 बजे थम जाएगा। निर्वाचन आयोग ने संवेदनशील बूथों पर कड़ी निगरानी के निर्देश दिए हैं और वेबकास्टिंग में किसी भी प्रकार की बाधा आने पर तुरंत पुनर्मतदान की चेतावनी दी है। सभी की नजरें अब 29 अप्रैल की वोटिंग पर टिकी हैं। 4 मई को होने वाली मतगणना यह साफ कर देगी कि क्या अमित शाह का 'अंगा, बंगा, कलिंगा' वाला मिशन सफल होता है या ममता बनर्जी तीसरी बार अपनी सत्ता बचाने में कामयाब रहती हैं। राज्य की जनता के लिए यह चुनाव केवल एक नई सरकार चुनने का जरिया नहीं है, बल्कि यह बंगाल की भविष्य की दिशा और दशा तय करने वाला जनादेश होगा।
All photo credit: ANI