पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण की वोटिंग 29 अप्रैल को होनी है। 142 सीटों पर मतदान से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैरकपुर में विशाल रैली कर दावा किया कि 4 मई के नतीजों के बाद वे बंगाल में BJP सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में लौटेंगे। यह बयान सिर्फ आत्मविश्वास नहीं, बल्कि BJP की पूरी चुनावी रणनीति का निचोड़ है।
चुनाव प्रचार के अंतिम दिन मोदी ने TMC पर 'सिंडिकेट राज', राजनीतिक हिंसा और आर्थिक गिरावट के गंभीर आरोप लगाए। साथ ही बंगाल के मतदाताओं को एक खुला पत्र लिखकर 'पोरिबोर्तन' यानी बदलाव का आह्वान किया।
मुख्य तथ्य और आकंड़े
पहले चरण में 152 सीटों पर 93.19 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया जो आजादी के बाद सबसे अधिक है। यह आंकड़ा बताता है कि इस बार जनता चुप नहीं है।
दूसरे चरण में सात जिलों उत्तर 24 परगना (33 सीटें), दक्षिण 24 परगना (31), नादिया (17), हावड़ा (16), कोलकाता (11), हुगली (18) और पूर्व बर्धमान (16) — की 142 सीटों पर मतदान होगा।
कुल 3.21 करोड़ मतदाताओं में 1.64 करोड़ पुरुष, 1.57 करोड़ महिलाएं और 792 ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल हैं। सुरक्षा के लिहाज से सात जिलों में केंद्रीय बलों की 2,321 कंपनियां तैनात हैं, जिनमें अकेले कोलकाता में 273 कंपनियां हैं। 142 सामान्य पर्यवेक्षक, 95 पुलिस पर्यवेक्षक और 100 व्यय पर्यवेक्षक भी तैनात किए गए हैं।
राजनीतिक
बंगाल में TMC पिछले 15 वर्षों से सत्ता में है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस बार खुद भवानीपुर से मैदान में हैं, जहां उनका मुकाबला BJP नेता सुवेंदु अधिकारी से है। TMC सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री भी इस चरण में चुनाव लड़ रहे हैं फिरहाद हकीम (कोलकाता पोर्ट), अरूप बिस्वास (टॉलीगंज), शशि पांजा (श्यामपुकुर) और ब्रात्य बसु (दमदम)।
BJP ने भी बड़े दांव लगाए हैं। पार्टी ने R.G. कर पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ को पनिहाटी से और माटुआ नेता सुब्रत ठाकुर को गाइघाटा से उम्मीदवार बनाया है। तपस रॉय (मानिकतला), स्वपन दासगुप्ता (रश्बिहारी) और ऋतेश तिवारी (कशीपुर बेलगछिया) भी BJP के प्रमुख चेहरे हैं।
यह चुनाव क्यों अहम है
बंगाल सिर्फ एक राज्य नहीं, राष्ट्रीय राजनीति का दर्पण है। मोदी ने खुद कहा बंगाल की तरक्की, भारत की तरक्की के लिए जरूरी है।" पूर्वी भारत का यह राज्य अगर BJP के खाते में जाता है, तो दक्षिण के बाद पूरब में भी पार्टी की जड़ें मजबूत हो जाएंगी।
गृहमंत्री अमित शाह ने बेहाला रोड शो के बाद घोषणा की कि चुनाव के बाद भी केंद्रीय बल 60 दिनों तक बंगाल में तैनात रहेंगे। यह बयान एक साथ कई संदेश देता है BJP जीत का दावा कर रही है, और साथ ही कानून-व्यवस्था पर TMC को घेर रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दो TMC पार्षदों को हिंसा की घटनाओं में गिरफ्तार किया गया और कई जिलों में क्रूड बम बरामद हुए यह स्थिति चुनावी माहौल की नाजुकता को दर्शाती है।
जमीन से लेकर दिल्ली तक
राजनीतिक प्रभाव: अगर BJP बंगाल में सरकार बनाती है तो यह 2026 में राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन के लिए सबसे बड़ा झटका होगा। ममता बनर्जी, जो खुद को विपक्ष की धुरी मानती हैं, की साख पर सीधा असर पड़ेगा।
आम जनता पर असर: पहले चरण की 93 प्रतिशत से अधिक वोटिंग बताती है कि मतदाता बदलाव के लिए उत्सुक हैं। महिलाएं, युवा और किसान तीनों वर्गों को BJP ने अपनी रैलियों में केंद्र में रखा है। मोदी के खुले पत्र में स्पष्ट शब्दों में कहा गया बेटियां सम्मान और सुरक्षा चाहती हैं।
प्रशासनिक प्रभाव: केंद्रीय बलों की रिकॉर्ड तैनाती और पर्यवेक्षकों की बड़ी संख्या यह संकेत देती है कि चुनाव आयोग इस बार किसी भी चूक के लिए तैयार नहीं। R.G. कर घटना जैसे संवेदनशील मामलों के उम्मीदवारों को मैदान में उतारना यह भी जनभावनाओं की राजनीतिक नब्ज थामने की कोशिश है।
दो चेहरों की लड़ाई
यह चुनाव दो अलग विजन की टकराहट है। TMC का तर्क है कि उसने बंगाल को 34 साल के वामपंथी शासन से निकाला और 'मां, माटी, मानुष' की राजनीति के जरिए राज्य को नई पहचान दी। दूसरी ओर, BJP का दावा है कि TMC के 15 साल में उद्योग बंद हुए, क्रूड बम फैक्ट्रियां खुलीं और 'सिंडिकेट राज' ने आम आदमी का जीना मुश्किल कर दिया।
मोदी ने बैरकपुर की ऐतिहासिक धरती जो 1857 की क्रांति का गवाह रही से अपना भाषण जोड़ा। यह प्रतीकात्मकता सोची-समझी है। वहीं उनका खुला पत्र और बांग्ला में ऑडियो संदेश बताता है कि BJP इस बार सिर्फ हिंदी भाषी मतदाताओं तक नहीं, बंगाली अस्मिता को भी छूना चाहती है।
सूत्रों के अनुसार, माटुआ समुदाय में BJP के उम्मीदवारों के नाम पर मतदाता सूची में बदलाव को लेकर जो चिंता है, वह पार्टी के लिए उत्तर 24 परगना में सीटें बचाने की चुनौती बन सकती है।
एक और पहलू जो अक्सर अनदेखा रह जाता है सबसे छोटी सीट भाटपाड़ा (1,17,195 मतदाता) और सबसे बड़ी चुंचुड़ा (2,75,715 मतदाता) के बीच का फासला यह दिखाता है कि बंगाल का चुनावी नक्शा बेहद विविध है। हर क्षेत्र में स्थानीय मुद्दे, जाति समीकरण और नेताओं की व्यक्तिगत पकड़ निर्णायक होगी।
आगे क्या
29 अप्रैल को मतदान संपन्न होने के बाद 4 मई को नतीजे आएंगे। अगर BJP 142 में से पर्याप्त सीटें जीतकर पहले चरण की 152 सीटों के साथ बहुमत बनाती है, तो यह भारतीय राजनीति में ऐतिहासिक घटना होगी।
अगर TMC अपना किला बचाने में सफल रहती है, तो ममता बनर्जी न सिर्फ बंगाल में, बल्कि राष्ट्रीय विपक्ष में भी और मजबूत होकर उभरेंगी। और यदि BJP का दावा सच निकला तो पूर्व भारत की राजनीति का रंग हमेशा के लिए बदल जाएगा।
अगर केंद्रीय बलों की 60 दिनों की तैनाती का मॉडल बंगाल में सफल और शांतिपूर्ण माना गया, तो भविष्य में अन्य राज्यों के चुनावों में भी यह नजीर बन सकती है।